दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था भारत पर प्रदूषित हवा का खतरा

नई दिल्ली :

एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन लंबे समय से धुंध भरे आसमान की समस्या से जूझता रहा है। इस समय विश्व में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था वाला देश भारत भी प्रदूषण की मार झेल रहा है। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 10 भारत के हैं।

कुसुम तोमर को दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेने की कीमत पता चल गई है। ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 29 साल की तोमर को फेफड़े का कैंसर हो गया है जबकि उन्होंने कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया। उनके पति विवेक ने इलाज कराने के लिए जमीन बेच दी। धीरे-धीरे जमा की हुई सारी रकम खर्च हो गई और परिवारवालों से उधार भी लेना पड़ा।

तोमर ने कहा, ‘सरकार देश के आर्थिक विकास के बारे में सोचती है लेकिन लोग बीमारी की वजह से मर रहे हैं। अगर हमारे देश के लोग बीमारी की वजह से आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं तो अर्थव्यवस्था कैसे विकसित हो सती है?’ मोदी सरकार का कहना है कि हवा में प्रदूषण कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन कारों से निकलने वाला धुआं और कॉन्स्ट्रक्शन साइट की धूल से बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए क्या ये कदम पर्याप्त होंगे?

सर्दियां शुरू होते ही मोदी सरकार की नीतियों की परीक्षा होने वाली है। इस समय धड़ल्ले से फसलें जलाई जा रही हैं और दिवाली पर वायु प्रदूषण खतरनाक हो जाता है। अगर सफल रूप से नीतियों को लागू किया जाता है तो भारत के लोग और सरकार और भी ज्यादा अमीर हो सकती है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक हेल्थ केयर फीस और प्रदूषण की वजह से प्रोडक्टिविटी का नुकसान भारत की जीडीपी का 8.5 प्रतिशत है।

इस समय भारत विश्व की सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था है। हालांकि चीन की अर्थव्यवस्था भारत से पांच गुना बड़ी है। भारत में अब भी विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है इसलिए प्रदूषण बढ़ने की आशंकाएं हैं। अरविंद कुमार ने जब सर गंगाराम अस्पताल में चेस्ट सर्जन के रूप में प्रैक्टिस शुरू की थी तो फेफड़े के कैंसर के ज्यादा तर मरीज मेल स्मोकर थे। उनका कहना है कि अब 60 प्रतिशत से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जो स्मोकिंग नहीं करते हैं और इनमें से आधी महिलाएं हैं।

हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण अस्थमा और लंग कैंसर जैसी बीमारियां पैदा कर रहे हैं। 2015 में इन बीमारियों की वजह से 11 लाख लोगों की मौत हुई। सिकागो यूनिवरर्सिटी के प्रफेसर माइकल ग्रीनस्टोन का कहना है कि भारत में वायु प्रदूषण कम करने की मांग प्रभावी रूप से न उठना एक बड़ी चुनौती है। भारत में वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली मौतों के अध्ययन की जरूरत है।

पर्यावरण मंत्री हर्षवर्द्धन ने कहा, ‘हम अभी यह तो नहीं कह सकते कि सबकुछ ठीक है लेकिन सुधार हुआ है। हम अभी प्रयास कर रहे हैं। मोदी सरकार ने सोलर पावर को बढ़ावा दिया। लोगों को गैस सिलिंडर दिया गया है। खेतों में फसल के अवशेष जलाए जाने पर भी रोक लगाई जा रही है।’ पर्यावरणविद् अब भी साफ हवा के लिए प्रभावी कदमों की राह देख रहे हैं।

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