मेले का आगाज: कड़कती ठंड पर आस्था पड़ी भारी, संतों ने किया शाही स्नान

प्रयागराज।

तीर्थराज प्रयाग में मकर संक्रांति के पहले शाही स्नान के साथ कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच मंगलवार तड़के कुंभ मेला शुरू हो गया है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी में कड़कती ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ी। श्रद्धालुओंं ने मध्यरात्रि के बाद से ही संगम में स्नान शुरू कर दिया। नाग संन्यासियों का शाही स्नान निर्धारित समय भोर 5:15 से शुरु हो गया।

कुंभ मेले के पहले शाही स्नान पर सभी श्रद्धालु एक दूसरे को बधाई देते नजर आए। सुबह सबसे पहले, 6:05 बजे महानिर्वाणी के साधु-संत पूरे लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान करने के लिए संगम तट पर पहुंचे। इसके साथ अखाड़ों के स्नान का क्रम प्रारंभ हुआ। सभी अखाड़ों को बारी-बारी से स्नान के लिए 30 मिनट से 45 मिनट तक का समय दिया गया। मेला प्रशासन ने बताया कि सुबह 7 बजे तक 16 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। निरंजनी अखाड़े की नवनियुक्त महामंडलेश्वर केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने भी अखाड़ा के साधु-महात्माओं के काफिले संग स्नान किया।

दिव्य और भव्य कुंभ का पहला मुख्य स्नान पर्व मकर संक्रांति मंगलवार को ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हो गया। संक्रांति की प्रतीक्षा अंत: करण को शुद्ध करने के विविध मंत्रों से तट गुंजायमान हो रहे हैं। श्रद्धालु डुबकी मारने के बाद ‘हर-हर महादेव’, ‘जय गंगे’ और ‘हर-हर गंगे’ का उच्चारण निर्वाध गति से कर रहे हैं।

आमतौर पर मकर संक्रांति का पावन पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन 2019 में सूर्य के मकर राशि में विलम्ब से जाने के कारण स्नान पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन पूजा-पाठ और स्नान-दान का काफी महत्व होता है। श्रद्धालु स्नान करने के बाद घाट पर बैठे पंडों को चावल, मूंग दाल, नमक, हल्दी का दान कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु तो कपड़े भी गरीबों में बांटते दिखें।

संगम किनारे रेती पर आस्था, भक्ति और आध्यात्मक का अद्भुत संसार बस चुका है। लघु भारत को अपने में समेटे कुंभ क्षेत्र में अखाड़ों में अध्यात्म की बयार बह रही है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों के संगम स्थल पर नागा साधुओं और फिर अन्य अखाड़ों के साधु एवं संतों के शाही स्नान के बाद श्रद्धालुओं का संगम तट पर डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है।

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