राजधानी की हवा में मौजूद धूल के महीन कण हुए थोड़े कम

पिछले साल से एक से डेढ़ मिलीग्राम प्रति घनमीटर तक कम हुई प्रदूषण की मात्रा

रायपुर: राजधानी की हवा में मौजूद धूल के महीन कणों के अलावा अपेक्षाकृत मोटे डस्ट भी अब पहले की तुलना में कम उड़ने लगे हैं। इसे पीएम 2.5 और पीएम-10 नाम दिया गया है। जानकारों के अनुसार वातावरण में प्रदूषण बढ़ने की कई वजह है। इसमें सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला कार्बन है।

इसके अलावा किसी भी निर्माण के तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल तथा उद्योगों से निकलने वाला धुंआ है। सरकारी एजेंसियां प्रदूषण बढ़ाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसकी वजह से लोगों में जागरुकता भी आई है। यही वजह है कि हवा में धूल के कणों की मात्रा कम हो रही है।

पीएम यानी हवा में मौजूद सूक्ष्म कण :

पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर हवा में ठोस या तरल रूप में मौजूद अति सूक्ष्म कण हैं। जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है उसे पीएम 2.5 और जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर से कम होता है उसे पीएम 10 कहते हैं। इन कणों में कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाईआक्साइड तथा लेड आदि घुले होते हैं जो जहरीले होते हैं।

कार्रवाई का असर : महापौर

महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि शहर में प्रदूषण को लेकर जागरूकता आई है। निगम सड़कों पर निर्माण सामग्री बिखेरने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। सड़कों की सफाई के मामले में काफी सख्त निर्देश हैं।

पुराने मकान-निर्माण इत्यादि तोड़ने के दौरान घर धूल और डस्ट रोकने के पर्याप्त इंतजाम किए बगैर तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। सार्वजनिक जगहों पर कूड़ा-करकट जलाने को लेकर भी अब जागरूकता बढ़ी है। पहले शहर में कहीं भी कचरे जला दिए जाते थे। अब लोग खुद होकर इसकी सूचना देते हैं।

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