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पहला तैरने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, बिजली जरूरतो को करेगा पूरा

पहला तैरने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, बिजली जरूरतो को करेगा पूरा

नई दिल्ली : रूस का पहला तैरने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र अकादेमिक लोमोनोसोव आर्कटिक बंदरगाह में अपने मिशन पर उतरने की तैयारी कर रहा है। जो अगले एक साल तक समुंद्र के सफर पर रहेगा। अपने सफर के दौरान सबसे पहले यह पूर्वी रूस के शहर पेवेक जाएगा। इसको पूर्वी साइबेरिया ले जाने से पहले बंदरगाह पर सयंत्र में परमाणु ईंधन भरा जाएगा।

माना जा रहा है कि 2019 में बिजली ग्रिड से जुड़ जाने पर यह तैरने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र 50,000 से ज्यादा लोगों को बिजली की आपूर्ति करेगा। इसका नाम नाम रूसी वैज्ञानिक मिखाइल लोमोनोसोव के नाम पर रखा गया है। इसका मकसद पूर्वी और उत्तरी साइबेरिया के दूरदराज के इलाकों में बिजली आपूर्ति करना और ऑयल रिफाइनिंग करना है। यह परमाणु सयंत्र 2 लाख की आबादी की बिजली की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

एफ.पी.यू का वर्गीकरण
लम्बाई :144 मीटर
चौड़ाई :30 मीटर
नाविक :69
औसत गत :4 नाट
भार :21,500

इससे दूरदराज के इलाकों में गैस और तेल का खनन करने वाले प्लेटफार्मों को बिजली मिलेगी। इस ऑपरेशन के इंचार्ज ने बताया कि ऐसे रिएक्टर की मदद से सालाना 50 हजार टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन रोका जा सकता है। हालांकि कई पर्यावरण के जानकार इसे न्यूक्लियर टाइटैनिक बता चुके हैं. वहीं, ग्रीनपीस ने इसको तैरता हुआ चेर्नोबिल बताया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्कटिक महासागर में तैरते हुए परमाणु रिएक्टर यहां के मौसम और हवाओं को देखते हुए खतरनाक हो सकते हैं। इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र 35 मेगावाट के दो न्यूक्लियर रिएक्टर हैं, जो रिएक्टर बर्फ के पहाड़ों को काटने वाले आइसब्रेकर शिप के रिएक्टर जैसे हैं। इससे दूरदराज के इलाकों में गैस और तेल का खनन करने वाले प्लेटफार्मों को बिजली मिलेगी।
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