छत्तीसगढ़

वन विभाग की लापरवाही अर्जुनी के ग्रामीणों ने 28 एकड़ क्षेत्र में रातों-रात कब्जा कर ताना तंबू

जंगल की सुरक्षा एवं अवैध कारोबार पर रोक लगाने मे वन विभाग हो रहा असक्षम साबित बिलाईगढ़ रेंजर नही उठाता फोन जो है चर्चा का विषय नाला में बाढ़ आ जाने से डूब जाता है गांव

– योगेश केशरवानी

बिलाईगढ़: बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र बिलाईगढ़ के हुर्रा डोंगरी के समतल पठार में वन विभाग की लापरवाही के चलते ग्राम अर्जुनी के ग्रामीणों ने लगभग 28 एकड़ क्षेत्र में रातों-रात कब्जा कर तंबू तान लिए। प्राप्त समाचार के अनुसार इन दिनों वन विभाग कई विषयों को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है यहां पदस्थ रेंजर स्थानीय व्यक्ति होने के कारण जंगल की सुरक्षा एवं अवैध कारोबार पर रोक लगाने से पूरी तरह अक्षम साबित हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण हुर्रा डोंगरी के जंगल में देखने को मिल रहा है। हुर्रा डोंगरी के पठार जो कि रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में आता है यहां पर लगभग 28 एकड़ क्षेत्र के पठार में अर्जुनी ग्राम के लगभग 40 परिवारों के द्वारा गत दिवस रातों-रात तंबू तान कर कब्जा कर लिया है और वन विभाग को पता ही नहीं चल पाया। लोगों की सूचना पर वन विभाग सक्रिय हुआ। तब तक कब्जा कर खुटे, खंभे, तालपत्री आदि लगाकर ग्रामीण रहना शुरू कर दिए थे।

कैसे होगी जंगल की सुरक्षा ?

यहां पदस्थ रेंजर स्थानीय व्यक्ति है कभी ड्यूटी पर जाता ही नहीं है और ना ही इनका अधीनस्थ कर्मचारियों से तालमेल अच्छा है तथा दैनिक वेतन श्रमिक एवं फायर वाचर, एवं नर्सरी के श्रमिकों को अपने निवास में निर्माणाधीन मकान में कार्य पर लगा रखा है इसी के प्रतिफल जंगलों की सुरक्षा में विपरीत असर पड़ रहा है जो कि पूरे क्षेत्र भर में चर्चा का विषय बना हुआ है रेंजर बिलाईगढ़ को 9753 121897 में मोबाइल लगाने से रिसीव नहीं करता है जिससे विभाग की जानकारी लोगों को नहीं हो पाता। बिलाईगढ़ में पदस्थ वनरक्षक नारायण निषाद ने बताया कि हुर्रा डोंगरी के आरक्षित वन में कक्ष क्रमांक 418 में ग्राम अर्जुनी के ग्रामीणों के द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। आज शुक्रवार को वन विभाग की टीम पुलिस बल लेकर कब्जा मुक्त कराने कब्ज़ा स्थल पहुंचे हुए थे लेकिन रेंजर कुछ बोल नहीं सका दैनिक श्रमिक एक दो लोग कब्जा हटाने के लिए बोल रहे थे और विभाग की टीम को बैरंग वापस होना पड़ा। इस संबंध में एसडीओ फॉरेस्ट कसडोल एवं डी एफ ओ बलोदा बाजार से संपर्क करने पर दोनों ने मोबाइल रिसीव नहीं किया।

कब्जा धारियों से चर्चा करने पर बताया कि सभी ग्रामवासी ग्राम अर्जुनी जो कि पूर्व में दिवानपुर में खाली जमीन को कब्जा किए थे और घर बसाना चाहते थे तो वन विभाग के कर्मचारियों ने डरा धमकाकर वहां बसने नहीं दिया था, तब उक्त स्थल से लगे हुए थोड़ी दूर ग्राम अर्जुनी नाला किनारे में जाकर बस गए। नाला में बाढ़ आ जाने से गांव डूब जाता है जिससे धन जन की हानि की संभावना बनी रहती है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि उक्त जमीन नक्शे में दीवानपुर के नाम से हैं यहां बसने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री ,कलेक्टर बलोदा बाजार ,एवं तहसीलदार बिलाईगढ़ को आवेदन देकर यहां कब्जा किया जा रहा है।

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