विकास के नाम पर वनों को उजाड़ने का खेल बंद हो : कांग्रेस

वन्यप्राणियों ने वनों से और इंसानों ने सरकार से बगावत कर रखी है

रायपुर: प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि इसे दुर्भाग्य कहे या जुमला छत्तीसगढ़ की सरकार. विगत पन्द्रह वर्षों में हाथियों को वनों में रखने तथा नक्सलियों को वनों से खदेडऩे में आज तक नाकाम है. विभिन्न प्रकार के प्रयासों एवं करोड़ों के खर्च के बाद भी विफलता ही हाथ लगी है. इस तरह अपने हक के लिए वन्यप्राणियों ने वनों से और इंसानों ने सरकार से बगावत कर रखी है. समूचे भारत के 6 राज्यों में सबसे अधिक नक्सलवादी छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं वहीं हाथियों के कुचलने से मनुष्यों की मौत एवं जान-माल की बर्बादी का आंकड़ा भी इसी राज्य में सर्वाधिक है.

हाथियों को वनों तक सीमित रखने को लेकर विगत डेढ़ दशक से केवल सलाहकार-विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही है. और नए-नए प्रयोगों का इस्तेमाल हो रहा है. कभी मधुमक्खी पालने. कभी बैरिकेट लगाने तो कभी नदियों के किनारे घांस लगाने का बजट तैयार कर भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी की जा रही है. गंभीरता से कोई कारगर कदम अभी तक नहीं उठाया गया है फलस्वरूप बेबस आदिवासी ग्रामीण एवं बेसहारा लोगों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है. यही स्थिति नक्सली वारदात से निपटने में हो रही है. पर कोई सफलता न मिलना इस सरकार की नीतियों की विफलता है. आज हालत यह है कि हाथी और नक्सली राजधानी की सीमा पर खड़े है और शहर में धावा बोलने को बेताब हैं जिससे खौफ बना हुआ है.

अब वन विभाग एक नया शिगुफा छोड़ रहा है कि हाथियों से निपटने सेवा निवृत्त अधिकारियों की मदद ली जायेगी और बतौर विशेषज्ञ उन्हें रखा जाएगा. यह हास्यास्पद है कि जो अफसर अपनी सेवाकाल में हिंसक हाथियों से राज्य को सुरक्षित नहीं रख सके. वे भला सेवा निवृत्ति के बाद क्या खाक सुधार ला सकेंगे? यह सरकार केवल रिटायर्ड अधिकारियों को साधने का काम कर रही है. विशेषज्ञ एवं सलाहकार के तौर पर रिटायरमेंट के बाद दो चार साल उन्हें बड़ी रकम देकर पोसने के अलावा उनसे कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है. इस प्रथा पर नियंत्रण लाने की आवश्यकता है वन्य प्राणी विभाग को युवा अफसर एवं कर्मियों की आवश्यकता है. वहां बतौर सजा लूप लाइन में सुस्त. अधेड़ एवं निष्क्रिय अधिकारियों की पदस्थापना से विभाग को पंगु बना दिया गया है. जबकि सक्रिय. उत्साही एवं मेहनती अधिकारियों को इस विभाग में जवाबदारी दी जानी चाहिए.

कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि वन क्षेत्रों में चल रहे विकास के नाम पर वनों को उजाडऩे का खेल बंद होना चाहिए. रिजर्व फारेस्ट एरिया में आधुनिक मशीनों के प्रवेश एवं कार्य ने वन्यप्राणियों को बेचैन कर रखा है. इसमें रोक लगनी चाहिए. कोयला. लोहा. बाक्साइड सहित अन्य अयस्कों का वनों से उत्खनन. सड़कों का चौड़ीकरण. बड़े-बड़े टावरों एवं विद्युत पोलों के नाम पर वनों की कटाई सहित विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य पर कठोरता से पाबंदी लगाए जाने की आवश्यकता है. तभी सरकार अवैध शिकार. अवैध कटाई और हाथियों सहित नक्सली गतिविधियों पर रोक लगाने में कामयाब हो सकेगी.

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