भारत में बाघ की आबादी दोगुनी करने का लक्ष्य – केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन

नई दिल्ली: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा. हर्षवर्धन ने देश में बाघ संरक्षण के उपायों में आई तेजी के परिणामस्वरूप इनकी संख्या में बढ़ोतरी का विश्वास व्यक्त किया है. डा. हर्षवर्धन ने 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मद्देनजर शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि देश में बाघों की गणना का काम जारी है. पिछले कुछ सालों में बाघ संरक्षण के प्रभावी उपायों को सुनिश्चित करते हुए सरकार ने बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है.

डॉ. हर्षवर्धन ने इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि अगर बाघों का संरक्षण सुनिश्चित कर लिया जाए तो यह तय है कि देश न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से भी निपटने में बहुत हद तक सफल रहेगा.

डा. हर्षवर्धन ने कहा ‘बाघों की गणना के शुरुआती रुझान इनकी संख्या में इजाफे का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं. यह बड़ी उपलब्धि है और इसलिए हमने बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है.’ उन्होंने कहा कि अभी दुनिया भर में मौजूद कुल बाघों की 70 फीसदी आबादी भारत में है.

बाघ संरक्षण में मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की निरंतर बढ़ती समस्या को भी उन्होंने एक चुनौती बताते हुए इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार की मदद से राज्यों के साथ मिलकर किए जा रहे उपायों को प्रभावी बनाने की जरूरत पर बल दिया. उल्लेखनीय है कि डा. हर्षवर्धन ने हाल ही में राज्यसभा में भी एक सवाल के जवाब में मनुष्य और जानवरों के संघर्ष की समस्या से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित कार्ययोजना की जानकारी सदन को दी थी.

उन्होंने पर्यावरण और बाघ संरक्षण अभियान में बच्चों की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इस दिशा में जागरुकता अभियानों को बच्चों की मदद से कामयाब बनाया जा सकता है. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सहअस्तित्व का सिद्धांत ही पर्यावरण संतुलन की जरूरतों को पूरा करने का एकमात्र विकल्प है.

भारत में 1973 में बाघ संरक्षण अभियान शुरू किया गया था. इस अभियान के तहत देश में मौजूद नौ बाघ अभयारण्यों की संख्या अब बढ़कर 50 हो गई है. अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर हर साल एक सप्ताह तक देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर बाघ संरक्षण के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है.

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