छत्तीसगढ़

बड़े फ्लाई ओवर बना विकास की गाथा गा रही सरकार, ग्रामीणों को नसीब नहीं है पूल

कांकेर: एक तरफ जहां बड़े बड़े फ्लाई ओवर बना कर प्रदेश सरकार विकास की गाथा गा रही है तो वही जिले में कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहाँ आज भी पक्के पूल नहीं होने के चलते ग्रामीणों को लकड़ी के पूल बना कर आवागमन करना पड़ रहा है और बारिश के मौसम में तो ये गांव ब्लॉक और जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट जाते है।

जिले के आमाबेड़ा दुर्गुकोंदल समेत कई इलाकों में यह स्तिथि है जिससे ग्रामीण आज भी आदि काल मे जीने विवश है। दुर्गुकोंदल के सोनपाल जाने वाले मार्ग पर बरसों से पूल की मांग की जाती रही है लेकिन शासन प्रशासन का ध्यान अब तक इस ओर नही गया है। मजबूरन ग्रामीणों को हर साल स्वयं श्रम दान कर लकड़ी का पूल अपनी सुविधा के लिए बनाना पड़ता है।

बारिश के मौसम में पानी के तेज़ बहाव के चलते ये पूल बह जाते है जिससे गांवो का संपर्क ब्लॉक और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है और 2 से 3 माह ये गांव टापू में तब्दील हो जाते है। दुर्गुकोंदल के साथ ही आमाबेड़ा क्षेत्र के भी 4 से 5 गांव ऐसे है जो नाले में पूल नही होने के चलते बारिश के मौसम में टापू बन जाते है।

स्वास्थ्य और राशन के लिए होती है खासी दिक्कत 

ग्रामीणों के अनुसार उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत राशन और स्वास्थ्य के लिए होती है। बारिश के मौसम में ब्लॉक मुख्यालय तक पहुचने कोई साधन नही होता क्योंकि लकड़ी के पूल बारिश में बह जाते है और गांव पूरी तरह से टापू बन जाता है। ऐसे में बारिश के पहले ही राशन इकट्ठा करना पड़ता है और यदि इस दौरान कोई गम्भीर रूप से बीमार पड़ गया तो फिर काफी दिक्कतो से गुजरना पड़ता है।

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