कल शुरू होगा ऐतिहासिक पुन्नी मेला

रायपुर।

हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर खारुन नदी के किनारे महादेवघाट में लगने वाला ‘कार्तिक मेला’ इस बार 23 से 25 नवंबर तक चलेगा। हालांकि हर साल दो दिन मेले का उत्साह रहता है, लेकिन इस बार तीसरे दिन रविवार होने के कारण तीन दिन तक रौनक रहेगी।

मेले के संबंध में हटकेश्वर नाथ महादेव मंदिर के पुजारी पं.सुरेश गिरी गोस्वामी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि 600 साल पहले राजा ब्रह्मदेव ने हटकेश्वर महादेव से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर 1428 में खारुन नदी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपनी प्रजा को भोज के लिए आमंत्रित किया।

हवन, पूजन, यज्ञ के बाद ग्रामीणों ने खेल तमाशे का आनंद लेते हुए भोजन ग्रहण किया था। इसके पश्चात हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन राजा ग्रामीणों को आमंत्रित करते। कालांतर में यह परंपरा मेले के रूप में परिवर्तित हो गई।

यह भी मान्यता है कि छत्तीसगढ़ से सैकड़ों किलोमीटर दूर राजस्थान स्थित पुष्कर तीर्थ में कार्तिक मेला लगता था। पूर्णिमा पर स्नान और पूजा में शामिल होने के लिे देशभर से श्रद्धालु पहुंचते थे। वहां तक जाने में छत्तीसगढ़ के लोगों को कई दिन लग जाते थे।

इसे देखते हुए राजा ब्रह्मदेव ने खारुन नदी के किनारे हटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करने का निर्णय लिया। पूजन-यज्ञ में अपनी प्रजा को न्योता दिया। हजारों ग्रामीणों के भोजन व ठहरने के लिए खारुन नदी के किनारे तंबू गाड़े गए।

बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व खेल-तमाशा, नाच-गाना की व्यवस्था की गई। पूजा में शामिल राजा ने ग्रामीणों को दान-दक्षिणा देकर विदा किया। तब से हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर मेला का आयोजन किया जा रहा है।

विष्णु-शंकर ने धरा अर्ध्य-नारीश्वर रूप

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार भगवान शंकर और भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा पर अर्ध्य-नारीश्वर का रूप धारण किया था। दो शक्ति को प्रसन्न करने के लिए पूर्णिमा की रात में तुलसी की मंजरी, कमल पुष्प चढ़ाकर जागरण किया जाता है। उषा काल में पूजा की जाती है।

आज होगा विशेष श्रृंगार

हटकेश्वर महादेव मंदिर में 22 नवंबर को अभिषेक पूजा पश्चात श्रृंगार किया जाएगा। 23 नवंबर को सुबह विशेष अभिषेक पूजा, महाआरती के बाद मेले का विधिवत शुभारंभ होगा। ब्रह्म मुहूर्त में नदी में कार्तिक स्नान करके महादेव का दर्शन किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीण मेला घूमने का आनंद लेंगे। दूसरे दिन 24 नवंबर को मेले का समापन होगा।

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