गुजरातराजनीति

राहुल गांधी और हार्दिक पटेल की मुलाकात जिस होटल में हुई वह बीजेपी नेता का था

राहुल गांधी और हार्दिक पटेल की मुलाकात जिस होटल में हुई वह बीजेपी नेता का था

राहुल गांधी और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मुलाकात की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था. गुजरात में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में हार्दिक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. सीसीटीवी फुटेज लीक होने के बावजूद हार्दिक कांग्रेस उपाध्यक्ष से मिलने की बातों से इंकार करते रहे हैं.

अब इस कहानी में नया मोड़ आया है. अहमदाबाद मिरर की खबर के मुताबिक जिस पांच सितारा होटल में हार्दिक और राहुल की सीक्रेट मीटिंग की बात कही जा रही है. वह दरअसल गुजरात बीजेपी के प्राइमरी मेंबर का है.

अहमदाबाद मिरर के अनुसार जिस होटल में हार्दिक पटेल को देखने का दावा किया जा रहा है वो अहमदाबाद का एयरपोर्ट सर्किल होटल है.

इस पंच-सितारा होटल पर हार्दिक पटेल ने जानबूझकर कुत्सित मंशा से सीसीटीवी फुटेज लीक करने का आरोप लगाया है. हार्दिक पटेल ने राहुल गांधी से मुलाकात से इनकार किया था. हार्दिक ने ट्वीट करके कहा था कि जब वो राहुल से मिलेंगे तो
खुलकर सभी को बताएंगे. हालांकि हार्दिक ने माना कि उन्होंने होटल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत से मुलाकात की थी. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के गुजरात प्रभारी हैं.

अमित शाह ने लगाया था कॉल गर्ल की सेवाएं देने का आरोप
चंपावद बीजेपी के दिवंगत नेता भैरो सिंह शेखावत के खिलाफ भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. फरवरी 2003 में चंपावत तब विवादों से घिर गए जब गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए आए पंजाब की तत्कालीन सरकार के तीन मंत्रियों उनके होटल में रुके थे और कॉल गर्ल की सेवाएं ली थीं. चंपावत के खिलाफ पुलिस में देह व्यापार रैकेट चलाने का मामला दर्ज किया गया था.

अहमदाबाद मिरर के अनुसार चंपावत के खिलाफ देह व्यापार रैकेट की जांच करने वाली पुलिस टीम में ऐसे अफसर भी थे जो इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी थे. इस जांच टीम में शामिल तरुण बरोट को इशरत जहाँ फर्जी मुठभेड़ मामले में करीब तीन साल न्यायिक हिरासत में रहे थे. बाद में बरोट रिटायर हो गये तो गुजरात सरकार ने उनकी सेवा की जरूरत बताते हुए नौकरी पर रख लिया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति पर गुजरात की बीजेपी सरकार को फटकार लगाते हुए नियुक्ति रद्द कर दी.

बरोट के बाद देह व्यापार रैकेट की जांच वरिष्ठ आईपीएस पीपी पाण्डेय कि निगरानी में होने लगी. पाण्डेय भी इशरत जहाँ मामले में गिरफ्तार हुए थे. देह व्यापार मामले की पूरी जांच क्राइम ब्रांच के तत्कालीन प्रमुख डीजी वंजारा के मातहत हो रही थी. वंजारा साल 2007 से 2015 तक विभिन्न फर्जी मुठभेड़ों में आरोपी होने की वजह से जेल में रह चुके हैं.

जब देह व्यापार का मामला दर्ज किया गया तो चंपावत कांग्रेस नेता थे. उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दी थी कि उन्हें राजनीतिक वजहों से परेशान किया जा रहा है. चंपावत ने हाई कोर्ट को बताया कि वो युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे हैं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी रहे हैं. अदालत ने उनके खिलाफ दायर मामले को रद्द करने का आदेश दिया था. आज भले ही चंपावत बीजेपी में हों लेकिन कांग्रेस नेताओं से भी उनके संबंध अच्छे हैं. हालिया राज्य सभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता अहमद पटेल उन्हीं के होटल में रुके थे.

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