मंत्रिमंडल में केशकाल की उपेक्षा से बढ़ रहा आक्रोश

आज तक किसी भी पार्टी ने नहीं दिया मत्रिमंडल मे स्थान

राज शार्दूल

कोण्डागांव।

मंत्रिमंडल में केशकाल की उपेक्षा के चलते क्षेत्र के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है । लोगों का कहना है कि क्षेत्र में चाहे किसी की भी सरकार हो केशकाल से मंत्री नहीं बनाया जाता। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले मध्यप्रदेश मे एवं उसके बाद भी केशकाल विधानसभा के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार से लोगों में खासी नाराजगी है।

इस बार योग्य एवं शिक्षित प्रत्याशी संतराम नेताम के भारी मतों से जीतने के बावजूद यहां से मंत्री नहीं बनाए जाने से फिर एक बार यह चर्चा जोरों पर है कि केशकाल में कद्दावर नेताओं के कमी के चलते केशकाल विधानसभा के लोगों का पार्टी पर दबाव नहीं बन पाता जिसके चलते केशकाल से आज तक कोई मंत्री नहीं बन पाया। मत्रिमंडल मे स्थान पाने के लिए केशकाल वर्षो से तरस रहा है।लगातार उपेक्षा के चलते पार्टी को इसका खामियाजा आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

इस बार केशकाल विधानसभा क्षेत्र से संतराम नेताम विगत 2013 के चुनाव की अपेक्षा दो गुने मतों के अंतर से चुनाव जीते हैं तथा भाजपा के गढ़ में लगातार कांग्रेस का परचम लहराया है। विगत चुनाव के परिणामों को देखने से पता चलता है कि केशकाल विधानसभा में लगातार दोबारा कोई भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता।

इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे संतराम नेताम ने भारी मतों से चुनाव जीतकर इस रिकॉर्ड को तोड़ नया इतिहास रचा। गौरतलब है कि संतराम नेताम उच्च शिक्षित एवं ऊर्जावान विधायकों में से माने जाते हैं। आदिवासी विधायकों में सबसे ज्यादा शिक्षित एवं लगातार भाजपा के गढ़ को ध्वस्त करने के बावजूद संतराम नेताम को मंत्री नहीं बनाया जाना इस क्षेत्र के लिए दुर्भाग्य जनक बात कही जा रही है। वे एलएलबी तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं ।

उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस करते हुए जनता की सेवा की। वे काफी समय तक पुलिस की नौकरी पर रहे तत्पश्चात उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में उतरने का फैसला लिया तथा जनपद सदस्य से शुरुआत की। जनपद सदस्य में चुनाव जीतने के पश्चात कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उनकी योग्यता को देखते हुए 2013 में चुनाव मैदान में उतारा । जहां उन्होंने भाजपा के गढ़ में तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी सेवक राम नेताम को हराया।

तत्पश्चात 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दोबारा उनके ऊपर विश्वास जताते हुए पुनः उनको टिकट दिया था। इस बार उन्होंने 16700 से अधिक मतों से जीत हासिल की। इसके पश्चात ही यह कयास लगाया जाता रहा कि संतराम नेताम को मंत्रिमंडल में अवश्य लिया जाएगा तथा लंबे समय से केशकाल विधानसभा क्षेत्र की जनता की आकांक्षाओं पर कांग्रेस पार्टी खरा उतरने की कोशिश करेगी।

किंतु ऐसा नहीं हुआ जबकि बस्तर संभाग से एकमात्र विधायक कवासी लखमा को ही मंत्रिमंडल में जगह दी गई है ।जिससे केशकाल ही नहीं अपितु पूरे बस्तर संभाग में पार्टी की छवि को धक्का लगा है जो कि सोशल मीडिया में भी देखा जा रहा है । बस्तर संभाग की मंत्रिमंडल में उपेक्षा को लेकर भाजपा ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस पार्टी के ऊपर कड़े प्रहार किए हैं। इसका असर लोकसभा चुनाव पर निश्चित रूप से पड़ेगा।

लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा असर

भाजपा की सरकार में बस्तरिया छत्तीसगढ़िया लोगों की उपेक्षा के चलते आम लोगों में काफी आक्रोश था जिसका परिणाम यह हुआ कि भाजपा गर्त पर चली गई। इस समय बस्तर संभाग से कांग्रेस पार्टी के 11 प्रत्याशियों की जीत हुई है । जिसमें 10 प्रत्याशी आदिवासी समाज से है।

बावजूद इसके बस्तर की मंत्रिमंडल में उपेक्षा से लोगों में नाराजगी स्वाभाविक है ।इस समय लोकसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर चल रही है ऐसी स्थिति में आदिवासी पिछड़े समाज की उपेक्षा कांग्रेस को भारी पड़ सकती है।

क्षेत्र वासियों का कहना है कि योग्य, शिक्षित, ऊर्जावान विधायक होने के बावजूद भी आदिवासियों की उपेक्षा से केशकाल ही नहीं अपितु बस्तर संभाग में कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।

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