खबर का असर: गायडबरी आदिवासी आश्रम की जांच में पहुंचे अधिकारी, मीडिया को फोटो लेने से किया मना, जांच भी संदेह के घेरे में

हितेश दीक्षित

पाण्डुका।

8 जनवरी को प्रकाशित समाचार आश्रम शाला में धुलवाया जाता चादर नामक शीर्षक से यह खबर दोनों आदिवासी आश्रम शाला में अध्यनरत छात्राओं से चादर धुलवाया जाता है। खबर के दस दिन के बाद जिला गरियाबंद के सहायक आयुक्त एल.आर. कुर्रे ने जांच के लिए टीम भेजी और तौरेंगा और गायडबरी आश्रम शालाओं में जांच कराया गया पर जांच से उन बच्चों के तकलीफे सामने नहीं आ पाया क्योंकि खबर छपने के बाद स्थानीय आश्रम अधीक्षक अपने तैयारी के साथ जांच टीम के साथ सामने अपना बयान दर्ज कराया।

जिसमें बच्चों ने डर और भय में सब कुछ सही बताया पर गायडबरी आश्रम शाला में जब बच्चों को उनकी तकलीफे पुछी गई थी ,तो उन्होने चादर धोने और मीनू के हिसाब से भोजन नहीं मिलने की बात बतायी थी,
पर आश्रम इन आदिवासी आश्रम शालाओं में सालो आश्रम अधिक्षक गांव के ही शिक्षक पदस्थ है।

और गांव में इनका अच्छा खासा राजनीतिक पकड़ होने के वजह से ग्राम के लोग इनके पक्ष में बोलने को तैयार रहते है। ऐसा ही कुछ कल शुक्रवार को आयी जांच टीम को देखने को मिला और जांच में पहुंचे अधिकारियों ने मिडिया टीम को समाचार कवरेज कर रहे समाचार संवाददाता को कवरेज करने से रोका।

जिसमें सहायक संचालक एस.एल. धृतलहरे ने फोटो खिचने के लिए मना किया और कहा कि जरूरत पड़ेगी तो हम आपको पुछेंगे। ऐसे में सत्ता परिर्वतन हो गया पर अधिकारियों के दिमाग से भाजपा शासनकाल में जो रौब अधिकारी रखते वह नहीं उतरा है और कांग्रेस के सत्ता आने के बाद भी परिर्वतन नहीं दिखता है।

इस प्रकार दोनों आश्रम शालाओं में अध्यनरत छात्रों की स्थिति जस की तस बनी है, और जांच में आए अधिकारियों को वही रटा रूटाया बयान बच्चों ने दिया जो बच्चों को आश्रम अधिक्षक ने सिखाया था और अधीक्षकों ने अपने पसंद के बच्चों से बयान दिलवाया।

इस प्रकार छुरा ब्लॉक में अध्यनरत आश्रम शाला एवं छात्रावासों की नियम के अनुसार पालन नहीं हो रहा है और
अधिकारियों की संरक्षण में आश्रम अधिक्षक बच्चों के राशन में कटौती कर अपने घर को चकाचक कर रहे है और चमचमाती गाड़ीयों में घुम रहे है।

अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वर्ग कहे जाने वाले छुरा ब्लॉक के आश्रमों की स्थिति दैयनीय है ,जिस पर अधिकारी सही जांच करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। वही इस बारे में जांच अधिकारी को पुछने पर बताया कि अभी मैं गाड़ी में आपसे मैं बात नहीं कर सकता बाद में बात करेंगे।

सहायक आयुक्त एस.एल. कुर्रे ने पुछने पर बताया कि अखबार में खबर के हिसाब से जांच टीम तैयार किया गया था, जांच रिर्पोट मिलने के बाद ही पता चलेगा की आज क्या जांच हुआ है, उसके बाद कार्यवाही की जायेगी। इस प्रकार मिडिया कवरेज को अधिकारी द्वारा रोकने से यह साफ-साफ समझ आता है कि किस प्रकार अधिकारी आश्रम शालाओं से अवगत होते हुए भी आश्रम अधीक्षकों को बचाने के लिए मिडिया कवरेज को रोकना चाहते है और सच्चाई सामने न जाय इस डर से बचते हुए नजर आए।

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