छत्तीसगढ़

निर्माण कार्य की आड़ में पेड़ों की भी अंधाधुंध कटाई, विरोध शुरू

अम्बिकापुर।

सूरजपुर जिले के तैमोर पिंगला अभ्यारण्य क्षेत्र अंतर्गत वनपरिक्षेत्र खोड में वन विभाग द्वारा कराया जा रहा बांध निर्माण विवादों में घिर गया है। विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी में कथित ठेकेदार जेसीबी से निर्माण कार्य की आड़ में पेड़ों की भी अंधाधुंध कटाई कर रहे है। पंचायत प्रतिनिधियों ने इस मनमानी पर आपत्ति दर्ज करा जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खोड़ वन परिक्षेत्र में बांध निर्माण के नाम पर जेसीबी से अवैध उत्खनन और परिवहन कराया जा रहा है। शिकायत पर स्थल जांच में पंचायत प्रतिनिधियों ने पाया कि माहोबाड़ केसर में जेसीबी मशीन लगाकर उत्तखनन किया जा रहा है जिसमें सात ट्रेक्टर भी परिवहन में लगे हुए थे।

वन विभाग का कोई भी जिम्म्मेदार अधिकारी उपस्थित नही था। मौके पर दो लोग मौजूद थे जिनका दावा था कि एसडीओ फारेस्ट और रेंजर द्वारा उन्हें कार्य करने का अधिकार दिया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी वन विभाग ने मशीनों से ही कार्य कराया था। कई माह पूर्व जिन ग्रामीणों ने मजदूरी की थी उसका भी भुगतान नही किया गया है। इसे लेकर उन्होंने आंदोलन भी किया था। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन भी दिया था कि सप्ताह भर के अंदर मजदूरी भुगतान हो जाएगा जिसके बावजूद भी आज तक मजदूरी भुगतान नही हो सका है।

काटे जा रहे पेड़

एक ओर अभ्यारण्य क्षेत्र होने के कारण वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता तोड़ने तक कि अनुमति ग्रामीणों को नहीं दी गई है। खोड़ में कई दशक से तेंदू पत्ता खरीदी भी विभाग द्वारा नहीं की जा रही है। वहीं इन सब के विपरीत विभाग द्वारा स्वयं ही अब तक लगभग 50 की संख्या में बड़े-बड़े साल व तेन्दू के पेड़ को काटकर ठूंठ में तब्दील कर दिया गया है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी खोड़ दयानन्द सोनवानी का दावा है कि एसडीओ व डीएफओ द्वारा आदेश प्राप्त है कि निर्माण कार्य जेसीबी मशीन से होगा और उक्त निर्माण कार्य के परिसीमा में आने वाले पेड़ो को भी काटने की स्वतंत्र अनुमति प्रदान की गई है। एसडीओ जयजीत केरकेट्टा ने बताया कि बांध निर्माण का कार्य वन विभाग द्वारा ठेके पर कराया जा रहा है। जेसीबी और ट्रेक्टर का उपयोग करने अनुमति दी गई है।

जनपद सदस्य सावित्री सिंह ने कहा कि जेसीबी मशीन लगाकर कार्य करना पूर्णतः गलत है। क्षेत्र के ग्रामीणों के पास पर्याप्त रोजगार नही है जिस कारण उनको पड़ोसी राज्य में मजदूरी करने जाना पड़ता है। ग्रामीणों की हमेशा मांग रहती है कि निर्माण कार्य मजदूरों से हो ताकि उनको रोजगार मिल सके।

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