दिव्य गुणों से निखरता है आन्तरिक सौन्दर्य: ब्रह्माकुमारी प्रभाती दीदी

आयोजित समर कैम्प में आन्तरिक सौन्दर्य विषय पर बोली

रायपुर: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्रभाती दीदी ने कहा कि अच्छा व्यक्तित्व उसे माना जाएगा, जो कि दिव्य गुणों से ओतप्रोत हो। बहुत से लोग सुन्दर कपड़ों और रूप, रंग के आधार पर व्यक्तित्व का आंकलन करते हैं किन्तु यह स्थायी सौन्दर्य नहीं है।

ब्रह्माकुमारी प्रभाती दीदी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित समर कैम्प में आन्तरिक सौन्दर्य विषय पर बोल रही थीं। उन्होंने आगे बतलाया कि प्रतिवर्ष विभिन्न सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में विश्व स्तर पर अनेक लोग विजयी होते हैं लेकिन कितने लोग उन्हें याद रख पाते हैं। जल्दी ही लोग उन्हें भुला भी देते हैं। जबकि महात्मा गाँधी जैसे लोग अत्यन्त साधारण होते हुए भी अपने सद्गुणों और अच्छे कार्यों के कारणमहान बने और आज दिन तक भी याद किए जाते हैं। इसी प्रकार हमें भी अपने आन्तरिक सौन्दर्य को बढ़ाना होगा।

संस्कारों में दिव्यता का महत्व

ब्रह्माकुमारी प्रभाती दीदी ने आगे बतलाया कि महत्व इस बात का नहीं होता है कि हमने कितनी महंगी चीजें धारण की हैं। वरन् महत्व इस बात का होता है कि हमारे संस्कारों में कितनी दिव्यता है। वास्तव में हमारा व्यक्तित्व बाहरी चीजों से नहीं अपितु आन्तरिक गुणों से बनता है। वर्तमान समय लोग अपने रूप रंग को संवारने में बहुत धन और श्रम जाया करते हैं किन्तु आन्तरिक सौन्दर्य के प्रति उदासीन बने रहते हैं। आन्तरिक सौन्दर्य को बढ़ाने के लिए चाहिए साइलेन्स पॉवर अर्थात राजयोग मेडिटेशन जिसके आधार पर हम अपने अवगुणों को परख कर सद्गुणों को धारण कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे कर्म ऐसे होने चाहिए कि जब हम इस दुनिया से जाएँ तो लोग हमें याद करें। समाज में हम अपनी छाप छोड़कर जाएँ। लक्ष्य उँचा रखने से वैसे लक्षण भी आ जाएंगे। हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कहते थे कि जीवन में उँचा लक्ष्य लेकर चलो। छोटा लक्ष्य रखना भी एक अपराध के समान है।

उन्होंने बतलाया कि दुुनिया में जितने भी महान पुरूष हुए हैं, उनके जीवन में सहनशीलता का गुण देखने को मिलता है। इस एक गुण के फलस्वरूप अन्य दूसरे गुण स्वत: खींचे चले आते है। सहनशीलता का गुण पत्थर को पूज्यनीय मूर्ति बना देता है।

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