छत्तीसगढ़

भूमिहीन गौपालक तिरथ ने गोबर बेचकर अपनी धर्मपत्नी को मंगलसूत्र के लिए सोना उपहार में दिया और बच्चों के लिए खरीदे कपड़े

गौधन योजना से जुड़ने के बाद गोबर बेचकर उनसे मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी से इस परिवार की ख्वाइशें और सपने पूरे हो रहे है

हिमांशु सिंह ठाकुर:- ब्यूरो रिपोर्ट कवर्धा।

कवर्धा : राजमिस्त्री के काम में दिनभर कड़ी मेहनत कर एक-एक पैसा जोड़ने वाले भूमिहीन तीरथ साहू के परिवार की आमदनी अब गौधन योजना से जुड़ने के बाद अब सचमुच आय दोगुनी हो गई है तीरथ साहू का परिवार आज हसी-खुशी जीवन यापन कर रहा है राजमिस्त्री से इस गौपालक परिवार की सिर्फ जरूरतें पूरी होती थी लेकिन गौधन योजना से जुड़ने के बाद गोबर बेचकर उनसे मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी से इस परिवार की ख्वाइशें और सपने पूरे हो रहे है

राजमिस्त्री ने गोबर बेचकर अपनी पत्नी केजाबाई के लिए तीन ग्राम का मंगलसूत्र के लिए सोने का तीन पत्ती और दो दाना खरीदा खरीदकर दीपावली के लिए उपहार भेंट किया है उन्होंने अपने बच्चों के लिए कपड़े की भी खरीददारी की है गौधन योजना शुरू होने से अब तक लगभग इस परिवार की 22,150 रूपए की शुद्ध आमदनी हुई है गोधन न्याय योजना में गोबर बेचकर मिली राशि से दिपोत्सव के पहले ही ग्रामीणों के लिए खुशियां मनाने का आधार बन गया है बात हो रही है

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विकासखण्ड कवर्धा के ग्राम गौठान प्रबंधन समिति सोनपुरी गुढ़ा में पंजीकृत पशु पालक केजा बाई पति तिरथ राम साहू और उसके परिवार के सदस्यों की गोधन न्याय योजना के शुरू से अब तक यू तो जिले में बहुत से हितग्राहियों ने अपना पंजीयन कराया है जिनके द्वारा गोबर बेच कर धन राशि सीधे उनके खाते में प्राप्त कर रहे है केजा बाई की पति तिरथ बताते है कि उनके परिवार के द्वारा योजना के तहत शुरू से घर में उपलब्ध गोबर और आस-पास से इकटठा किया हुआ गोबर अपनी समिति को बेचते है

गोधन योजना शुरू होने से अबतक लगभग 22,150 रूपए की धन राशि का गोबर बेचे है कुछ समय पहले खाते में लगभग 15 से 16 हजार रुपए मिल गया है जिससे पत्नी केजा बाई के लिए तीन ग्राम का मंगलसूत्र के लिए तीन पत्ती और दो दाना खरीदा तिरथ आगे बताते है की हमारा कोई खेती-बाड़ी नहीं है मैं छोटा-मोटा राजमिस्त्री का काम करता हूं गोधन न्याय योजना में मेरी पत्नी केजा बाई ने अपना पंजीयन यह सोच कर कराया था की कभी सरकार की योजना काम आ जाएगी लेकिन क्या पता था की घर में कभी खुशिया इस योजना से मिलेगी केजा बाई पहले स्कूल में रसोइया का काम करती थी

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लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लगे लाॅकडाउन से अब-तक वह कार्य बन्द हैं ऐसी स्थिति में गोधन न्याय योजना मेरे परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है केजा बाई और बच्चे गांव के आस-पास घूमकर गोबर इकटठा करते है और उसे अपने समिति में बेच रहें है जिसके परिणाम स्वरूप अच्छा आमदनी हो रही है इस योजना से मिलने फायदा से अभी घर की और जरूरतें और सपने पूरी हो जाएगी तिरथ राम साहू ने चर्चा करते हुए आगे बताया की दिवाली के पहले मिला आर्थिक सहयोग घर में खुशियो का माहोल ले आया है

सरकार की गोधन न्याय योजना हम जैसे ठेठ छत्तीसगढिया को गोबर से जुड़े परम्परागत कार्य को लाभ लेने का सुनहरा अवसर दिया है गौठान प्रबंधन समिति सोनपुरी गुढ़ा के सचिव बताते है कि हितग्राही केजा बाई और उसका परिवार योजना में शुरू से जुड़ कर गोबर विक्रय कर रहा हैं यही कारण है की शासन द्वारा गोबर विक्रय की राशि जारी करने पर इन्हें सीधे आर्थिक लाभ हुआ है और पूरा पैसा इनके अपने बैंक खाते ज़िला सहकारी बैंक शाखा दशरंगपुर में गया है पैसा मिल जाने से केजा बाई और उसका परिवार अपने दैनिक जरूरतों को पूरा कर रहा है विशेष रूप से इनके परिवार ने अपने लिए आभूषण भी खरीदा है इनका शेष राशि भी बैंक खाते में आ गया है

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मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम विजय दयाराम के. ने चर्चा करते हुए बताया की जिले में योजना प्रारंभ 20 जुलाई से आज पर्यन्त तक पंजीकृत हितग्राहियों से गोबर की खरिदी हो रही है जिसका भुगतान राज्य शासन द्वारा निरंतर जारी किया जा रहा है यह योजना की सफलता ही है की जो परिवार कुछ समय पहले सिर्फ जरूरत ही जुटा पाता था वे अब जीवन में दो कदम आगे बढ़ते हुए अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर रहा है निश्चित ही केजा बाई और उनके परिवार जैसे अन्य हितग्राहियों को मिलने वाला लाभ गोधन न्याय योजना के सफल होने की पहचान है

उल्लेखनीय है की ज़िले में प्रथम और दूसरे चरण सहित कुल 224 गौठान बनाया गया है जिनका लोकार्पण कवर्धा विधायक एवं कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने किया था इन्ही गौठान में गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी का कार्य हो रहा है गौठान लोकार्पण के समय से ही ग्रामीणों को लगातार फायदा मिलने लगा है जो सुराजी गांव योजना का मुख्य ध्येय था कैबिनेट मंत्री की सक्रियता से लगातार बेहतर कार्य जिले में हो रहे है जिसका फायदा ग्रामीण को मिलता दिख रहा है।

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