छत्तीसगढ़ के महापुरूषों सस्मरण की उपेक्षा किया जा रहा है :ललित चन्द्रनाहू

रायपुर।

किसान मजदूर संघ-छत्तीसगढ़ के सयोजक ललित चन्द्रनाहू ने कहा कि देश के आजादी के संघर्ष में छत्तीसगढ के अनेकों महापुरूष नेताओं ने आहूति दिये। जिसमें जमीदार शहीद वीरनारायण सिंह बिंझवार आदिवासी को अकाल के भूखमरी से मौत से जूझ रहे जनता को अनाज दिलाने हेतु हथियार उठाकर अंग्रेज सरकार के विरूद्ध बगावत करने पर फांसी की सजा दी गई।

आजादी के आंदोलन के साथ सामाजिक क्रांति के लिए छुआ-छुत के विरूद्ध आंदोलन चलाने वाले पं. सुंदरलाल शर्मा महात्मा गांधी के गुरू, आजादी के नेता गुंडाधुर, आजादी के आंदोलन के बाद भू-दान आंदोलन के प्रमुख तथा प्रथम नेता प्रतिपक्ष त्यागमूर्ति ठा. प्यारेलाल सिंह, आजादी के आंदोलन के नेता छत्तीसगढ़ राज्य स्वपनदृष्टा डाॅ. खूबचंद बघेल, एवं जमीदार लाल श्याम शाह, बैरिस्टर छेदीलाल आदि प्रमुख है।

जिनके संस्मरण की उपेक्षा किया जा रहा है। अभी छ.ग. विधानसभा भवन के सेंट्रल हाल में 40 लाख रू. खर्च कर डाॅ. भीमराव अम्बेडकर, प्रथम राष्ट्रपति प्रथम राजेन्द्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, प्रथम उद्योम मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी, एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय, संत बाबा गुरूघासी दास, शहीद वीरनारायण सिंह के तैलचित्र लगाये गये। जिसमें पं. सुंदरलाल शर्मा, गुंड़ाधुर, ठा. प्यारेलाल सिंह, डाॅ. खूबचंद बघेल, लालश्याम शाह, बैरिस्टर छेदीलाल के संस्मरण की उपेक्षा तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के साथ पाकिस्तान से प्रथम युद्ध के नायक प्रधानमंत्री लालबाहदूर शास्त्री एवं द्वितीय युद्ध के इंदिरा गांधी की उपेक्षा की गई। वैसे तो 8 तैलचित्रों में 40 लाख रू. खर्च करना फिजूल खर्च है।

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