पत्रकारिता का मिशन बदल गया है : छगन लाल मूंदडा

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का 14वां स्थापना दिवस समारोह 

रायपुर : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का 14 वां स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के चेयरमैन छंगन लाल मूंदड़ा एवं मुख्य वक्ता साहित्यकार एवं जनसंपर्क विशेषज्ञ डा. सुशील त्रिवेदी थे। समारोह कुलपति प्रो. (डा.) एम.एस. परमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। 

मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के चेयरमैन छंगन लाल मूंदड़ा ने विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस की बधाई देते हुए चिंतक, विचारक एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. कुशाभाऊ ठाकरे जी को याद किया। उन्होंने कहा कि ठाकरे जी से हमारे पारिवारिक संबंध रहे. ठाकरे जी को सब अपना मानते थे और ठाकरे जी सभी को. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का, जीवन और देश के लिए कितना महत्व है, इस बात को ध्यान में रखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह जी ने यहां विश्वविद्यालय की स्थापना की। विश्वविद्यालय का उद्घाटन भी देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री और पत्रकार अटल बिहारी बाजपेयी ने किया। मूंदड़ा ने पत्रकारिता की दशा और दिशा पर भी अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता डा. सुशील त्रिवेदी ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रगति की प्रशंसा की एवं स्थापना दिवस की बधाई दी। अपने उद्बोधन में डा. त्रिवेदी ने कहा कि भारत में नवजारण 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद आया और उसी के साथ पत्रकारिता भी आई। स्वतंत्रता संग्राम के जितने भी बड़े नेता थे वे सब पत्रकार थे। उस समय के जितने बड़े साहित्यकार थे वे भी पत्रकार होते थे। इन सभी का उद्देश्य होता था भारत की संस्कृति को ऊंचा उठाना और समाज में बदलाव लाना। आजादी के बाद स्थिति बदल गई है। पत्रकारिता की दिशा और दशा पर डा. त्रिवेदी ने कहा कि महात्मा गांधी और पत्रकार बाबू राव विष्णु पराड़कर ने पत्रकारिता को लेकर जो चिंता उस समय की थी, वह चिंता आज भी बनी हुई है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डा.) एम.एस. परमार ने कहा कि शासन, प्रशासन एवं यहां के नागरिकों ने विश्वविद्यालय के त्वरित विकास में योगदान किया। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे जी के व्यक्तित्व को याद किया। प्रो. परमार ने कहा कि इसी दिन 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री, पत्रकार एवं कवि अटलबिहारी बाजपेयी जी ने इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय की यात्रा में संस्थापक कुलपति डा. सच्चिदानंद जोशी के योगदान को याद किया। प्रो. परमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ और विशेषकर रायपुर मंल सबसे ज्यादा राष्ट्रीय स्तर के संस्थान हैं। 

अंत में आभार प्रदर्शन कुलसचिव डा. अतुल कुमार तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार का मूल स्वभाव जागते रहो का संदेश देना है। इस अवसर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के अध्यक्ष प्रवीण मैशेरी सहित गणमान्य नागरिक, विश्वविद्यालय के अतिथि प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र- छात्राएं उपस्थित थे।

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