फिल्में छोड़ नेता बनी इस एक्ट्रेस के घर मिली थीं 10 हजार साड़ियां

जयललिता ने एक मामूली फिल्म एक्ट्रेस से शक्त‍िशाली राजनेता तक का सफर तय किया. जयललिता 24 फरवरी 1948 को जन्मी थीं. 15 वर्ष की उम्र में फिल्मी करियर शुरू करने वाली जयललिता ने सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस के रूप में नाम कमाया.

जयललिता ने एक मामूली फिल्म एक्ट्रेस से शक्त‍िशाली राजनेता तक का सफर तय किया. जयललिता 24 फरवरी 1948 को जन्मी थीं. 15 वर्ष की उम्र में फिल्मी करियर शुरू करने वाली जयललिता ने सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस के रूप में नाम कमाया.

जयललिता साउथ के ख्यात सुपरस्टार एमजीआर को अपना गुरु मानती थीं. उनके साथ जयललिता ने 28 फिल्मों में काम किया. एमजीआर भारतीय राजनीति के सम्मानित नेताओं में थे.

जयललिता ने कई साल पहले एक तमिल पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनके पिता एक आलसी इंसान थे, जिनका काम करने में मन नहीं लगता था. उनकी मां ने 16 साल की उम्र में पढ़ाई छुड़वा थी और अभिनय करके पैसा कमाने के लिए मजबूर किया था.

उन्होंने यह भी स्वीकारा था कि बचपन की यादें ताजा होने पर आज भी उनकी की आंखें छलछला जाती हैं. वहीं लोग ये भी कहते हैं कि उनके चिड़चिड़े व्यवहार के पीछे उनका बिखरा हुआ बचपन ही था.

कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि जयललिता अपनी पहली तमिल फिल्म उस समय देख पाई नहीं थीं. दरअसल इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला था और वह तब मात्र 16 साल की थीं. इस फिल्म का नाम था Vennira Aadai यानी सफेद वस्त्र.

जयललिता को महंगी साड़ियों और जूतों का काफी क्रेज था. उनके यहां जब CBI के छापे पड़े थे, तब उनके पास से 750 जोड़ी जूते मिले थे. यही नहीं, इस छापे में कई किलो सोना और डेढ़ किलो रत्नों से जड़ी कमर की पेटी भी जब्त हुई थी. इसके अलावा, उनके पास से 10,500 बेहद महंगी साड़ियां भी मिली थीं.

एक खास बात ये भी है कि उनको गहरे रंग की साड़ियों से खासा लगाव था. हल्के रंग की साड़ी उन्होंने शायद ही कभी पहनी होगी. वहीं उनको स्टोल और शॉल ओढ़ने का शौक खासतौर पर रहा है. बताया जाता है कि एक बार उन्होंने बुलेट-प्रूफ जैकेट के ऊपर भी शॉल ओढ़ी थी.

जयललिता को गुस्सैल और गजब का जिद्दी भी बताया जाता था. 80 के दशक का एक किस्सा तो आज भी याद किया जाता है-राज्यसभा की सदस्यता के दिनों वह अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान अकसर तमिलनाडु भवन में रहतीं. उस के लिए वहां का स्टाफ उनकी पसंद का खास ड्रिंक (जिन और नारियल पानी) बनाकर रखना कभी नहीं भूलता था.

लेकिन एक बार वहां के कर्मचारी नारियल खरीदना भूल गए. इस बात पर उन्होंने तमिलनाडु भवन के शीशे तोड़ने शुरू कर दिए. आखिरकार भवन के अफसरों ने हरियाणा भवन से नारियल पानी मंगा कर जयललिता को उनका पसंदीदा ड्रिंक पेश किया. तब वह शांत हुईं.

एक समय जयललिता फिल्मी दुनिया को अलविदा कहकर एमजीआर के साथ राजनीति में आ गई थीं. कहा जाता है कि अंग्रेजी में उनकी मजबूती को देखकर एमजीआर उनको राजनीति में लेकर आए थे.एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठन किया.

साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया और राज्यसभा के लिए मनोनित किया. एमजीआर के निधन के बाद जयललिता साल 1987 में पूरी तरह उभर कर सामने आईं.

जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. हालांकि साल 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा.

लेकिन तब तक जयललिता एक मजबूत राजनीतिक हस्ती बन चुकी थीं.27 सितंबर 2014 को बंगलुरु की एक अदालत ने जयलिलता को आय से अधिक संपत्त‍ि के मामले में चार साल कैद की सजा सुनाई. 5 दिसंबर, 2016 को लंबी बीमारी के बाद जयललिता का निधन हो गया. उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए थे.

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