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डकैतों के जीवन पर बनी फिल्म ‘सोनचिड़िया’ आज सिनेमाघरों में रिलीज

मध्य भारत में भी डकैतों के अतीत की झलक देखने मिलेगी

नई दिल्ली: बतौर एक्टर सुशांत सिंह राजपूत, मनोज वाजपेयी, भूमि पेडनेकर और रणवीर शौरी के साथ बनी फिल्म ‘सोनचिड़िया’ आज सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आरएसवीपी की फिल्म ‘सोनचिड़िया’ चंबल के बीहड़ों पर बनी फिल्म है। जहां सभी एक्टर चंबल डाकुओं के किरदार में नजर आएंगे।

फिल्म के प्रचार को एक पायदान ऊपर ले जाते हुए ‘सोनचिड़िया’ की टीम ने निर्देशक अभिषेक चौबे ने हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत, भूमि पेडनेकर और रणवीर शौरी के साथ डाकुओं से मिलने के लिए चंबल का दौरा भी किया था.

मध्यप्रदेश की घाटियों में वास्तविक स्थानों पर फिल्माई गई ‘सोनचिड़िया’ में मध्य भारत में डकैतों के अतीत की झलक देखने मिलेगी. बता दें कि ‘सोनचिड़िया’ से पहले भी बॉलीवुड में चंबल और डाकुओं के जीवन पर कुछ बेहतरीन फिल्में बनी हैं…

शोले

1975 में आई फिल्म ‘शोले’ उस दौर की सबसे हिट फिल्म थी. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, हेमा मालिनी, जया बच्चन और अमजद खान लीड रोल निभाते नजर आए थे. इस फिल्म में रामगढ़ के ‘गब्बर सिंह’ और उनके आतंक को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं.

मदर इंडिया

1957 में आई सुपर हिट फिल्म ‘मदर इंडिया’ में मशहूर एक्टर्स नर्गिस, सुनील दत्त और राजेंद्र कुमार थे. फिल्म में सुनील दत्त और राजेंद्र कुमार दोनों ने नर्गिस के बेटों की भूमिका निभाई थी. फिल्म यूं तो एक अकेली मां के जीवन की कहानी थी लेकिन इस फिल्म में साहूकार के जुल्मों का शिकार बनकर सुनील दत्त डाकू बन जाते हैं. इसके बाद मां बनीं नर्गिस खुद से ही अपने हाथों अपने बेटे को गोली मार देती हैं.

डाकू हसीना

जीनत अमान और राकेश रोशन की फिल्म ‘डाकू हसीना’ साल 1987 में पर्दे पर आई थी. इस फिल्म में जीनत जो कि पूजा सक्सेना का किरदार निभा रही थीं डकैत बनकर अपने मां-बाप की मौत का बदला लेती हैं. यही नहीं इस फिल्म में ‘रजनीकांत’ का एक छोटा सा खास रोल भी था.

बैंडिट क्वीन

साल 1994 में खूंखार डाकू फूलन देवी पर बनी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ भी शानदार फिल्मों में से एक है जिसमें डाकू फूलन देवी की जीवनी दिखाई गई थी. इस फिल्म में डाकू फूलन देवी का किरदार एक्ट्रेस सीमा विश्वास ने निभाया था.

पान सिंह तोमर

‘पान सिंह तोमर’ 2012 में आई इमरान खान के अभिनय की एक बेहतरीन फिल्म है. 1981 में पान सिंह पुलिस एनकाउंटर में मारे गए थे. दरअसल यह फिल्म एक सैनिक की जीवनी पर बनी थी जोकि बाद में एक डकैत बन जाता है.

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