बैंक से लिंक है नंबर, रिचार्ज नहीं कराया तो पार हो सकती है रकम

अंकित मिंज

बिलासपुर।

अपने मोबाइल नंबर पर अगर आपने समय पर रिचार्ज नहीं कराया है और नंबर बैंक खाते से लिंकअप है तो ठग गिरोह कभी भी आपके नंबर को हथियाकर खाते से रकम पार कर सकते हैं। शहर के ऐसे 3 मामले अब तक सामने आ चुके हैं जिसमें लोगों को पता नहीं चला और उनके खातों से रकम पार हो गई।

नए तरीके से हो रही इस ठगी से निबटने में पुलिस ने भी हथियार डाल दिए हैं। सेल्युलर कंपनियों ने एक महीने तक मोबाइल में रिचार्ज और बात करने की समय सीमा तय कर दी है।

निर्धारित समय सीमा में रिचार्ज नहीं करने पर सेल्युलर कंपनियां लोगों के नंबर अस्थायी रूप से बंद कर रहीं हैं। साथ ही सेल्युलर कंपनियों ने नए नंबर की जगह पुराने मोबाइल नंबरों को नए सिम में एलॉट करने की सुविधा ग्राहकों के लिए शुरू कर दी है। यानी किसी व्यक्ति के पुराने नंबर कई दिनों से बंद हो गए हैं तो उसे कंपनी दूसरे व्यक्ति को एलॉट कर रही हैं।

पुराने और अस्थायी रूप से बंद किए गए नंबरों को ठग गिरोह हथियाने लगे हैं। नया सिम लेकर गिरोह के सदस्य उनके आईएमईआई नंबर को संबंधित सेल्युलर कंपनी को भेजकर दूसरें के नंबर हथिया रहे रहे हैं। दूसरों के मोबाइल नंबरों को इंटरनेट के माध्यम से सर्च कर इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग में उपयोग किए जाने के तलाशते हैं।

दूसरे के नए नंबर से इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग का उपयोग होने की जानकारी मिलते ही गिरोह के सदस्य बैंक खाते की पूरे डाटा हैक कर लेते हैं। इधर पुराने नंबर पर इनकमिंग और आउटगोईंग कॉल सेवा बंद होने के कारण लोगों को खाते से संबंधित जानकारी दूसरे व्यक्तियों तक पहुंचने की भनक तक नहीं लगती।

उधर गिरोह दूसरे के मोबाइल नंबरों से खाते नंबर निकालने के बाद खाते से रकम दूसरे खातों और मोबाइल वायलेट पर भेजते हैं। रकम ट्रांसफर की प्रक्रिया में बैंक रजिस्टर्ड मोबाइल पर ओटीपी नंबर भेजकर खाता धारक की जांच करते हैं।

मोबाइल पर ओटीपी नंबर ठग बैंक को भेजते हैं और रकम गिरोह खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं। ठगी से बचना है तो समय पर करते रहें रिचार्ज: जिन मोबाइल नंबरों को लोगों ने अपने खाते में होने वाले लेनदेन की जानकारी लेने के लिए बैंक खातों से लिंकअप किया है, उन मोबाइल नंबरों पर इनकमिंग और आउटगोइंग सेवा नियमित रखनी चाहिए।

इससे मोबाइल नंबर के मालिकों के खाते सुरक्षित रहेंगे। साथ ही ठग गिरोह उनके बैंक खातों की जानकारी हथियाने में सफल नहीं हो पाएंगे।

वेरीफिकेशन के नाम पर हो रही खानापूर्ति

ठग गिरोह अपने सिम को खराब होने का हवाला देकर सेल्युलर कंपनियों को नया नंबर एलॉट करने के लिए कंपनियों को टोलफ्री नंबरों पर संपर्क कर नए सिमकार्ड का आईएमईआई नंबर भेजते हैं। मनचाहा नंबर लेने के लिए ठगी करने वाले सेल्युलर कंपनियों के मामूली नियमों को पूरा करते हैं। सेल्युलर कंपनियां नंबर एलॉट करते समय व्यक्तियों के नाम और पते का वेरीफिकेशन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करती है।

ठगी रोकने पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं

नए सिम नंबर लेकर ठग गिरोह लोगों के खातों से रकम पार रहे हैं। ठगी रोकने के लिए पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं है। विभाग की ओर से सेल्युलर कंपनियों और बैंकों को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें सेल्युलर कंपनियों को नंबर बदलने वालों के नाम पते और अस्थायी नंबर एलॉट करते समय वेरिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत रखने कहा जाएगा।

साथ ही बैंक अधिकारियों को आनलाइन ट्रांजिक्शन के दौरान विशेष सतर्कता रखने और ट्रांजिक्शन से पहले 2-3 बार वेरिफिकेशन करने कहा जाएगा। बैंक और सेल्युलर कंपनियों के अधिकारियों द्वारा ही नए तरीके की ठगी को रोका जा सकता है।
विजय अग्रवाल, एएसपी

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