छत्तीसगढ़

शास्वत सुख की प्राप्ति का एकमात्र उपाय है संयम : मुमुक्षु लोकेश

रायपुर : ऋषभदेव जैन मंदिर सदरबाजार में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में निपुणाश्री की विदुषी शिष्या स्नेहयशा की अंतेवासिनी साध्वी रत्ननिधि आदि ठाणा-3 की निश्रा में गुरुवार को मुमुक्षु लोकेश गोलछा, जगदलपुर का ट्रस्ट की ओर से सामूहिक अभिनंदन-बहुमान किया गया। मुमुक्षु लोकेश गोलछा 15 नवम्बर को राजस्थान के चैटनगर के समीप जैन भगवती दीक्षा ग्रहण करने जा रहे हैं। प्रवचन सभा के उपरांत मुमुक्षु गोलछा का बहुमान ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्र्टी प्रकाशचंद सुराना के हाथों तिलक कर शॉल और श्रीफल भेंट कर किया गया। वहीं डॉ. धरमचंद रामपुरिया और जैन श्वेताम्बर चातुर्मास समिति के निवर्तमान अध्यक्ष महेन्द्र कोचर की ओर से उन्हें रायपुर श्रीसंघ की ओर से अभिनंदन पत्र भेंट किया गया।

सभा का संचालन कर रहे युवा स्वाध्यायी सुरेश भंसाली ने भाव गीत `संयम से प्रीत लगाते रहो` की मधुर और प्रेरक प्रस्तुति दी। इस प्रसंग पर मुमुक्षु लोकेश गोलछा ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, आदि, व्याधि और उपाधियों से भरे इस मानव जीवन में शांति, समाधि कैसे प्राप्त हो। पाप-संतापों से त्रस्त मानव के समक्ष ये ऐसे प्रश्न हैं जो हमेशा उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों में उभरते ही रहेंगे। आज व्यक्ति एक-एक समस्या के निराकरण के लिए न जाने कहां-कहां भटकता फिरता है, गृह क्लेश, अशांति निवारण, धन प्राप्ति, सुख-समृद्धि की कामना से वह कई उपाय करता है, हाथ की अंगुलियों में मूंगा, माणिक, मोती, पन्ना धारण कर वह इनमें अपनी शांति की तलाश करने की कोशिश करता है, पर इन सबसे होता क्या है, उसके मानस पर प्रश्न चिह्न ज्यों के त्यों खड़े ही रहते हैं। समस्याओं के मूलभूत कारणों को यदि नहीं समझा जाएगा तो ये समस्याएं कभी खत्म नहीं होने वाली हैं। वर्ष 2010 की कार्तिक पूनम को गुरुदेव श्रीमद् पियुषसागर के चातुर्मास में मैंने पहली बार गुरुवंदन किया, और फिर गुरुदेव के श्रीमुख से जिनवाणी सुनी तो एक-एक कर मुझे अपनी समस्याओं का समाधान मिलता गया। समस्याओं के निराकरण के लिए जिज्ञासा और सद्गुरु के प्रति समर्पण ये दो तत्व आवश्यक हैं। जिज्ञासा यह कि मैं क्या हूं, कहां से आया हूं, मुझे कहां जाना है। इन जिज्ञासाओं का समाधान करने वाले एकमात्र गुरु भगवंत ही होते हैं, मैंने गुरुदेव की ओर से बताए गए समाधान के उपायों को आचरण का विषय बनाना फिर से शुरू किया और यह क्रम चलता रहा। फिर मुझे भान होता गया कि ये इच्छाएं, तृष्णाएं, वासनाएं ऐसी चीजें हैं जो कभी शांत होने वाली नहीं हैं, चाहे इन्हें पाने जन्मों बीत जाएं पर कभी तृप्ति, संतुष्टि होने वाली नहीं। उन्होंने 15 नवम्बर को राजस्थान के चैटनगर में अपने स्वर्णिम क्षणों का स्मरण करते हुए इस अवसर को देने वाले गुरुदेव और साधु भगवंतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सभी धर्मप्रेमीजनों से उनके दीक्षा प्रसंग के साक्षी बनने का अनुग्रह किया। उन्होंने कहा कि, मेरे जीवन के वे स्वर्णिम क्षण आपके जीवन में भी वैसे स्वर्णिम क्षण लाएंगे, यही मंगलकामना है।

मोक्ष मार्ग की सीढ़ी है चारित्र्य जीवन : साध्वी रत्ननिधि
इस दौरान साध्वी रत्ननिधि ने कहा कि, यह चारित्र्य जीवन ऐसा जीवन है, जहां कर्मों का शीघ्र ही नाश किया जा सकता है। चारित्र्य जीवन में वह शक्ति है कि ज्यादा से ज्यादा 8 भवों में आत्मा मोक्ष को प्राप्त कर ही लेती है और यदि भाव चारित्र्य आ गया तो इससे भी कम भवों में आत्मा को मोक्ष प्राप्ति संभव है। जिनशासन में चारित्र्य धर्म की महत्ता बताई गई है। हर मनुष्यात्मा के 10 प्राण होते हैं, उन 10 प्राणों से जो एक प्राण गुरु भगवंत को समर्पित कर देते हैं वे इस संसार सागर से पार होकर मुक्ति मंजिल को प्राप्त हो जाते हैं। इसी क्रम में साध्वी सिद्धांतनिधि ने कहा कि मुमुक्षु लोकेश गोलछा पुण्यशाली हैं, धन्य हैं वे और धन्य है उनका परिवार। जौहरी का डिप्लोमा लेकर अब वे अपनी आत्मा को सजाने-संवारने का कार्य कर रहे हैं।

स्वाध्याय प्रतिक्रमण गु्रप और खरतरगच्छ युवा परिषद ने भी किया बहुमान
मुमुक्षु लोकेश गोलछा का स्वाध्याय प्रतिक्रमण गु्रप-एसपीजी और अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद रायपुर शाखा की ओर से बहुमान किया गया। इस दौरान एसपीजी के कन्नू कांकरिया, हेमू गोलछा, शैलेन्द्र संकलेचा, तरुण कोचर, अमर बरलोटा, नीलेश गोलछा, नरेश बुरड़, उज्ज्वल झाबक, अमित मुणोत, तरुण लोढ़ा, पारस पारख और अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद रायपुर शाखा के अध्यक्ष सुरेश भंसाली, सचिव पारस पारख और उपाध्यक्ष तरुण कोचर, सचिव दुग्गड़, छोटू गोलछा, विनय भंसाली के हाथों शॉल, श्रीफल भेंट कर और तिलक कर उनका बहुमान किया गया।

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शास्वत सुख
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