जानवरों से निपटने का अनोखा तरीका ईजाद किया मथुरा के लोगों ने, जाने पूरी ख़बर!

ऐसे में जानवर खड़ी फसलों को बर्बाद करने लग जाते हैं। लगातार नुकसान झेल रहे किसान अब उग्र हैं।

लखनऊ।
मथुरा और आसपास के इलाकों में लोगों ने आवारा जानवरों से निपटने का अनोखा तरीका ईजाद किया है। प्रशासन से गुहार लगाने के बाद जब उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया तो मथुरा, हाथरस और अलीगढ़ के लोगों ने आवारा जानवरों को पकड़कर स्कूलों और अस्पतालों में बंद कर दिया।

बुधवार को लगातार तीसरे दिन किसानों ने पशुओं को घेर-घेर कर स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों में बंद करा दिया। इससे अस्पतालों में दवाई और स्कूलों में पढ़ाई बंद हो गई है।

अलीगढ़ की इगलास तहसील क्षेत्रों दर्जनभर से अधिक प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छुट्टी कराकर पशुओं को बंद कर दिया गया है। कमोवेश पूरे जिले का यही हाल है।

मथुरा और हाथरस में भी हालात गंभीर होने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ के स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही सैकड़ों पशु बंद हैं।

स्कूलों में पढ़ाई बंद

जानकारी के मुताबिक पशुपालक दुधारू पशुओं को दूध निकालने के बाद आवारा छोड़ देते हैं। ऐसे में जानवर खड़ी फसलों को बर्बाद करने लग जाते हैं। लगातार नुकसान झेल रहे किसान अब उग्र हैं।

पूरे जिले में तनाव के हालात बनने लगे हैं। पुलिस-प्रशासन तीन दिन से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे समस्या बढ़ी जा रही है।

अलीगढ़ और हाथरस दोनों जिलों में कई विद्यालयों में बड़ी संख्या में पशु ठूंस दिए गए। शिक्षकों ने पशुओं से बचने के लिए खुद को कमरों में बंद कर लिया। पढ़ने आए बच्चे बाहर खड़े इंतजार करते दिखे।

फिलहाल समस्या का कोई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। हाथरस में पशुओं को खेतों में छोडऩे से नाराज किसानों ने गांव टुकसान स्थित बालाजी गौ अस्पताल पर पथराव कर दिया। कई तहसीलों क्षेत्रों के स्कूलों में पशु बंद किए जाने से पढ़ाई ठप है।

अलीगढ़ पीएचसी में 900 सौ पशु बंद

आवारा पशुओं से त्रस्त किसानों का गुस्सा मंगलवार को कम नहीं हो पाया। इगलास तहसील के कस्बा गोरई के किसानों ने खेतों से घेर कर करीब 900 आवारा पशुओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बंद कर दिया।

सूचना पर पहुंचे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की किसानों ने एक न सुनी। वे पशुओं को गांव से बाहर भेजने की जिद पर अड़े थे।

करीब 10 घंटे बाद पशुओं को टप्पल गोशाला भेजने की कवायद शुरू हुई। मांट रोड पर आवादी क्षेत्र में स्थित पीएचसी में क्रिसमस डे के चलते मंगलवार को अवकाश था।

किसानों ने सुबह आठ बजे से ही इसमें आवारा पशुओं को बंद करना शुरू कर दिया। दोपहर दो बजे तक किसान पशुओं के झुंड लेकर आए। कई किसान तो ट्रैक्टर -ट्रॉली व बुग्गियों में भरकर लाए।

इसके बाद गेट पर ताला लगाकर किसानों ने डेरा डाल दिया। सूचना पर तहसीलदार मनीष कुमार समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे।

अवैध कब्जे हटवाकर गोशाला बनवाने का सुझाव

पीएचसी के सामने स्थित क्षेत्रिय सहकारी समिति पर बैठक बुमें प्रमुख किसानों के अलावा आसपास की कई गांवों के प्रधान भी शामिल हुए।

एसडीएम अशोक कुमार ने पीएचसी से पशुओं को हटाने का दवाब डाला लेकिन किसान राजी नहीं हुए।

ग्रामीणों ने हरजीका बांस गांव की नौ बीघा चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जे हटवाकर गोशाला बनवाने का सुझाव दिया।

इस जमीन पर देर शाम अधिकारियों ने निशानदेही कराई गई। इसके चलते पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के चलते पीएचसी में दो घंटे ओपीडी होनी थी, लेकिन पशुओं को चलते ऐसा नहीं हो सका।

प्रधान कमलेश देवी के पति राजकुमार सिंह का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का निदान नहीं हो रहा। किसान करे भी क्या?
एसडीएम अशोक शर्मा का कहना है कि गांव हरजी का बांस में नौ बीघा चारागाह की जमीन से अवैध कब्जा हटवाकर गोशाला बनवाई जाएगी।

मथुरा में प्राइमरी स्कूल में बंद किए आवारा पशु

मथुरा के सुरीर क्षेत्र के गांव भालई में किसानों ने आवारा पशुओं को प्राइमरी विद्यालय में बंद कर बाहर से ताला जड़ दिया। गुस्साए किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर हंगामा किया।

गौरतलब है कि आए दिन आवारा पशु सांड़, गाय आदि जानवर किसानों की दिन-रात मेहनत से की गई फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।

आवारा पशु खेतों में घुस जाते हैं, फिर पूरी तरह से फसल को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान सहना पड़ रहा है।

किसान बेहद परेशान हैं। प्रशासनिक अनदेखी के कारण अब किसानों ने आवारा पशुओं को एकत्रित कर गांव के सरकारी स्कूलों में बांधना शुरू कर दिया है।

बुधवार को गांव भालई में किसानों ने दर्जनों पशुओं को एकत्रित कर स्कूल में बंद कर दिया।

मौके पर पहुंचे चौकी इंचार्ज दीपक नागर ने किसानों को समझाया और फोन कर पशुओं को स्कूलों में बंद करने की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी। स्कूल में पशुओं को देख पढ़ने आने वाले बच्चे घर लौट गए।

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