स्टडी सेंटरों में मनचाहा प्रतिशत पाने होता है ठेका

स्टडी सेंटरों के संचालक कुछ वर्षो में ही बन गए करोड़पति

मनमोहन पात्रे

बिलासपुर। झूठ बोलकर व विज्ञापनों के आधार पर अपने आप को सबसे बेस्ट यूनिवर्सिटी कहने वाले डाॅ.सीवी रमन विश्वविद्यालय की काली करतूतों का पर्दाफाश होने लगा है, योग्य छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस रमन विश्वविद्यालय के पापों का घड़ा जल्द ही भरने वाला है, क्योंकि कहावत है न कि अति का अंत होता है और इस विश्वविद्यालय ने इतने फर्जी डिग्री की दलाली किये है और इतने झूठ बोल चुके है कि जब इनपर उच्च स्तरीय जांच या कानूनी कार्यवाही होगी तब सारी सच्चाई सामने आ जायेगी।

सीवी रमन विश्वविद्यालय की सबसे खास बात यह है कि शायद ही कोई एैसा निजी विश्वविद्यालय होगा जो प्रसार-प्रसार के लिये इतने रूपये खर्चा करता होगा, प्रचार प्रसार तो अपनी जगह है हर छोटे-बडे़ अवसरों में कुछ अखबारनवीशों को मालामाल करने में भी यह विवि नही चूकती। छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कार्यकाल के कुछ मंत्री व उच्च स्तर के अधिकारीगण रमन विवि के फर्जी डिग्री बांटने जैसे दलाली वाले कृत्य में खुद को शामिल कर काली कमाई का एक मोटा हिस्सा डकारते गये, जिससे कि योग्य विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

पूरे छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में हर व्यक्ति चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हो या न हो यह जानता है कि सीवी रमन फर्जी डिग्री बांटता है क्योंकि वहां कौन-कौन से काले कारनामे होते है अभी हाल ही में पूरे शिक्षातंत्र को दीमक की खोखला करने में इस रमन विवि ने किसी भी प्रकार की कोई कसर नही छोड़ी है और ये अपने आप में राज्य व केन्द्र सरकार के लिये चुनौती बनती जा रही है।

देश के प्रधानमंत्री को भेजे गये शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया था कि डाॅ. सीवी रमन विवि फर्जी डिग्री बेच फर्जीवाड़ा करता आया है साथ ही अन्य शिकायतों का भी जिक्र की गया था और इसकी जांच की मांग की गई थी उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को मामले में कार्यवाही करने पत्र भी आया जिस पर इस मामले को निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को सौंप दिया गया, जिसके बाद शिकायतकर्ता और सीवी रमन प्रबंधन को सुनवाई में उपस्थित होेने बुलवाया गया।

शिकायर्ता के दस्तावेजों को देख निजी विश्वविद्यालय के चेयरमेन अंजनी कुमार शुक्ला के द्वारा रमन विवि प्रबंधन की ओर से देरी से आये सीवी रमन विवि के अधिकारियों का जमकर फटकार लगाई और रमन विश्वविद्यालय में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न करने हिदायत भी दी, और शिकायत मिलने पर कड़ी कार्यवाही की बात भी कही थी, परंतु निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के इस कड़े रूख के बाद भी डाॅ सीवी रमन विवि को किसी बात की परवाह नही है और ये बेखौफ होकर अपनी मनमानी कर मोटी रकम लेकर मनचाहा प्रतिशत प्रदान कर रहा है और स्टडी सेंटरों में खुलेआम नकल की जा रही।

इस बात का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सीवी रमन विवि के जो प्रदेश भर में स्टडी सेंटर संचालित है उन संचालक के पास वर्तमान में कितनी संपत्ति है और स्टडी सेंटर संचालन के पूर्व में कितनी संपत्ति थी ? यह पूरी बात जांच के धेरेे में है जिसके लिये एक विशेष उच्चस्तरीय जांच दल की आवश्यकता है।

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