राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एन.ए.एल.एस.ए. के अखिल भारतीय कानूनी जागरूकता और आउटरीच अभियान का शुभारंभ किया

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अपने कामकाजी समय का एक हिस्सा कमजोर लोगों को नि:शुल्क सेवाएं प्रदान करने के लिए निर्धारित करना चाहिए। राष्ट्रपति ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एन.ए.एल.एस.ए. के अखिल भारतीय कानूनी जागरूकता और आउटरीच अभियान का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।

श्री कोविंद ने कहा कि कानूनी सेवा संस्थानों की संरचना न्यायिक वास्तुकला को सहयोग देती है और राष्ट्रीय, राज्य, जिला तथा अनुमंडल स्तर पर इसे स्थिरता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सहयोग और स्थिरता बड़ी संख्या में कमजोर वर्गों की सेवा के लिए महत्वपूर्ण है। श्री कोविंद ने कानूनी सेवा प्राधिकरणों से नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्‍यों के बारे में विशेष रूप से सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जानकारी की कमी होने से कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा आती है, क्योंकि वास्तविक लाभार्थी अपने अधिकारों से अनभिज्ञ रहते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मध्यस्थता, सुलह तथा लोक अदालतों सहित वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र हमें शांति और न्याय के प्राचीन मूल्यों की याद दिलाते हैं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण 25 साल पहले अपनी स्‍थापना के समय से ही इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। श्री कोविंद ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान लोक अदालतों ने 1 करोड़ 11 लाख से अधिक लंबित मामलों का निपटारा किया है। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के इस सहयोग से न्यायिक व्यवस्था पर बोझ कम होता है।

राष्‍ट्रपति ने देश के मुख्य न्यायाधीश न्‍यायमूर्ति एन वी रमना और न्यायमूर्ति यू यू ललित को लोक अदालत की प्रणाली में नई ऊर्जा का संचार करने तथा नागरिकों को त्वरित न्याय प्रदान करने में सहायता के लिए बधाई दी।

गांधी जयंती पर जागरूकता अभियान शुरू करने के लिए प्राधिकरण की सराहना करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी मानवता की सेवा के प्रतीक हैं, जिसमें दलितों को न्याय दिलाने में मदद करने वाली सेवाएं भी शामिल हैं।

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