केंद्र व राज्य के जनप्रतिनिधि को नहीं है पत्रकार की चिंता पत्रकार का दर्द कौन सुने

छत्तीसगढ़ प्रदेश के दुर्ग जिले के 4 पत्रकारों ने कोरोना जैसे महामारी से ग्रषित होकर इलाज के अभाव में ऑक्सीजन नही मिलने के उपरांत अपना दम तोड़ दिया।

हिमांशु सिंह ठाकुर:- ब्यूरो कवर्धा।

रायपुर : पूरे विश्व मे पिछले एक वर्ष में कोरोना जैसे महामारी ने एक भयावह रूप ले चुका है परंतु पत्रकार कोरोना जैसे महामारी के बीच अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य पूरी ईमानदारी पूर्वक कर रहे है आपको बता दे कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से सभी आम जन मानस तक मीडिया अपनी भूमिका निभाते हुए समाचार का प्रकाशन कर रहे है बावजूद इसके कोरोना जैसे महामारी के बीच अपनी पूरी जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करने वाले पत्रकार की कोई भी चिंता न ही केंद्र में बैठे बड़े राजनीतिक दलों को है और न ही राज्य के सत्ता रूढ़ पार्टी के राजनीतिक दलों को कोरोना महामारी के बीच बखूबी कार्य करने वाले पत्रकार की आखिरकार किसी को नही है चिंता? बावजूद इसके लगातार कोरोना ने पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया है कोरोना सभी जगह दस्तक दे चुका है

जिसके कारण पूरे विश्व में लगातार संक्रमण बढ़ता जा रहा है हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन की कमी के कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश के दुर्ग जिले के 4 पत्रकारों ने कोरोना जैसे महामारी से ग्रषित होकर इलाज के अभाव में ऑक्सीजन नही मिलने के उपरांत अपना दम तोड़ दिया।वही राज्य व केंद्र के सभी राजनीतिक दलों के नेताओ को शासन की ओर से सभी सुविधा मुहैया कराई जाती है परंतु पत्रकारों के प्रति कोई भी जन प्रतिनिधि ने आज तक आवाज़ नही उठाई राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के दौरान हमेशा झूठा अस्वाशन देकर कहा जाता है कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम आपकी सभी मांगे पूरी करेंगे परंतु आज एक पत्रकार के दर्द को समझने वाला कोई नही पत्रकार को आज तक न ही फ्रंट लाइन वारियर भी नही घोषित किया गया आखिरकार क्या पत्रकार एक आम इंसान नही?

कोरोना की वैक्सीन 

प्रदेश में कोरोना की वैक्सीन रोजाना लगाई जा रही है पत्रकार संगठनों द्वारा भी मुख्यमंत्री से इस विषय को गंभीरता से लेने की बात कही गई थी परंतु अब तक कोई भी लिखित सूचना प्रशासनिक तौर पर नही दिया गया केवल केंद्र व राज्य के ही तमाम बड़े मंत्रियो को बड़ी से बड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है अगर एक पत्रकार अपने जिम्मेदारी निभाते हुए कोरोना जैसे महामारी के बीच उसकी मृत्यु हो जाये तो उसके परिवार को राज्य व केंद्र द्वारा कोई भी आर्थिक सहायता प्रदान नही कराई जाती न ही अब तक राज्य शासन द्वारा पत्रकारों का बीमा कराया जा सका इस बीच पत्रकार के परिवार को राज्य सरकार क्या सुविधा मुहैया कराती है

पत्रकार अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे है परंतु उनका सुनने वाला आज कोई नही राजनीतिक दलों व प्रशासनिक अधिकारी सहित आम जन मानस तक उनके बातों को पंहुचाने वाला एक पत्रकार है वही अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्टाचार करे तो आम जनमानस तक पहुँचाने का कार्य भी एक पत्रकार ही करता है परंतु न ही उन्हें कोई सहयोग मिल रही और न ही उन्हें फ्रंट लाइन वारियर घोषित किया गया आज हालात इतने बिगड़ चुके है कि लगातर प्रदेश में संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है फिर भी आज पत्रकार अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य कर रहा है अगर इस बीच पत्रकार के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसका जिम्मेदार कौन?

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