शव को लेकर दाह संस्कार के लिए श्मशान पहुंचे परिजनों को लगा सदमा, जाने वजह

शव सौंपे जाने के समय मृतक के परिजनों ने गलत शिनाख्त कर दी और दूसरी बॉडी को लेकर दाह संस्कार के लिए श्मशान घाट चले गए

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेज व सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना संक्रमित 70 वर्षीय ओम प्रकाश उपाध्याय का सोमवार को निधन हो गया. सूचना पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में शव की गलत शिनाख्त कर दी और दूसरे के शव को लेकर दाह संस्कार के लिए श्मशान चले गए.

लेकिन दाह संस्कार के दौरान मृतक के पुत्र ने शव का चेहरा देखा तो उसके होश उड़ गए, उसने कहा कि यह शव मेरे पिता ओम प्रकाश का नहीं है, बल्कि किसी और का है. जिसकी सूचना तुरंत पीजीआई के अधिकारियों को दी गई. पता चला कि जिसकी डेड बॉडी राजघाट पर गलत शिनाख्त की वजह लाई गई थी, वह प्रकाश नारायण राय की थी.

आजमगढ़ के अस्पताल का मामला

जब प्रकाश नारायण राय के परिजन उनका शव लेने अस्पताल गए तो पता चला कि उनका शव गलती से राजघाट पर पहुंच गया है. इसके बाद ओम प्रकाश उपाध्याय के परिजनों ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉक्टर दीपक पांडेय से संपर्क किया. नोडल अधिकारी ने परिजनों से बताया कि ओम प्रकाश का शव मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी रूम में है, उसे वहां से ले जा सकते हैं.

दूसरी तरफ गलती से प्रकाश नारायण राय के शव को परिजनों को शिनाख्त कराने के बाद राजघाट पर ही सुपुर्द कर दिया गया, जिनका कोविड गाइड लाइन के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इस पूरे प्रकरण पर पीजीआई अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉक्टर दीपक पांडेय द्वारा बताया कि पुलिस की मौजूदगी में मृतक के परिजनों में से किसी एक से शव की शिनाख्त कराई जाती है. इसके बाद परिजनों से रिसीविंग लेकर शव को दाह संस्कार के लिए सुपुर्द किया जाता है. परिजनों द्वारा गलत शिनाख्त कर दी गयी थी, जिसे समय रहते पहचान लिया गया. फिलहाल, सही शिनाख्त कराकर बदले हुए शवो को परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है.

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