मोटे लोगों में गुर्दे के कैंसर का खतरा,बरतें ये सावधानी

लखनऊ। मोटापे से सिर्फ ब्लड प्रेशर, दिल और शुगर ही नहीं गुर्दे के कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। जिनके पेट पर चर्बी अधिक रहती है, ऐसे लोग संजीदा रहें। जीवनशैली और खान-पान में तब्दीली लाकर गुर्दे के कैंसर के खतरों को काफी हद तक टाल सकते हैं। यह सलाह केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग के डॉ. मनोज यादव ने दी।

वह रविवार को केजीएमयू जनरल सर्जरी और यूरोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित यूरोआंकोकॉन को संबोधित कर रहे थे। साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में सेमिनार हुआ।

डॉ. मनोज यादव ने कहा कि मोटापा बीमारियों की जड़ है। मोटापे की वजह से शरीर की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। दिल, ब्लड प्रेशर, शुगर, हड्डी जैसी बीमारी हो जाती हैं। ऐसे में शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। मोटापे की वजह से गुर्दा ठीक से काम नहीं कर पाता है। टॉक्सिक (जहरीले तत्व) पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर ठीक से नहीं निकल पाते हैं। इससे गुर्दे का कैंसर पनप सकता है।

देर से नजर आते हैं लक्षण: जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. एचएस पहवा ने बताया कि गुर्दे के कैंसर के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते हैं। पेशाब से खून आना, गिल्टियां, कमर के ऊपर हिस्से में दर्द आदि लक्षण हैं।

अल्ट्रासाउंड से पकड़े बीमारी: डॉ. नीरज रस्तोगी ने बताया कि गुर्दे के कैंसर से बचने के लिए साल में कम से कम एक बार सामान्य जांचें जरूर करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड जांच से गुर्दे के कैंसर को शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है। इसके अलावा खून व पेशाब की जांचें कराएं। यदि पेशाब में खून आ रहा तो जांच कराकर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

भूख से कम खाना खाएं: केजीएमयू जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. मनीष अग्रवाल ने बताया गुर्दे के कैंसर समेत दूसरी गंभीर बीमारी से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार लाएं। मोटापे से बचें। भूख से 30 प्रतिशत कम भोजन करें। इससे खाना पचने में अंगों को आसानी रहती है। ज्यादा खाना खाने से अंगों को मेहनत करने में अड़चन आती है। नियमित कसरत करें। नमक और चीनी का सेवन कम करें। हरी सब्जियां और मौसमी फलों का पर्याप्त सेवन करें। प्रदूषण से बचें।

धूम्रपान से तौबा करें

मोटे लोग जो धूम्रपान का सेवन करते हैं उनमें गुर्दे के कैंसर खतरा 50 गुना अधिक होता है। बीडी-सिगरेट, पान-मसाला खाने से खून में हानिकारक तत्व मिल जाते हैं। यह खून गुर्दे के माध्यम से साफ होता है। मसाला-बीडी में कैंसर फैलाने वाले 400 तत्व होते हैं जो गुर्दे में जम जाते हैं।

पॉलिथीन में गर्म खाना नुकसानदेह

प्लॉस्टिक की पन्नी में चाय, कॉफी समेत दूसरे खाने-पीने की वस्तुओं को लाने से बचे। डॉ. एचएस पहवा ने बताया कि शरीर में किसी भी तरह की गांठ को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर की सलाह पर जांच करें।

कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कारगर नहीं

पीजीआई रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. नीरज रस्तोगी ने बताया कि गुर्दे के कैंसर में सबसे दुखद पहलू ही उसमें कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कारगर नहीं है। यही नहीं ऑपरेशन कराने के बाद 35 प्रतिशत मरीजों में बीमारी के दोबारा फैलने का खतरा बढ़ जाता है। गुर्दे का कैंसर सबसे पहले फेफड़े, दिमाग और लिवर समेत दूसरे अंगों को अपनी चपेट में लेता है।

नई दवाओं से इलाज आसान

चकगंजरिया स्थित कैंसर संस्थान में रेडियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने कहा कि नई दवाओं से गुर्दे के कैंसर को हराना आसान हो गया है। यह दवाएं मॉलीक्यूलर स्तर पर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। बीमारी को खत्म करने के साथ ही मरीज का इम्यून सिस्टम (रोगों से लड़ने की ताकत) को मजबूत करती है। नतीजतन मरीज में ताकत आती है। जीवनशैली में सुधार होता है।

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