मुफ्त में सब्ज़ी नहीं बेचने पर जिसे झूठे मुकदमे में फंसाया गया उसका परिवार कर्ज़ में डूब चुका है

पटना में 14 साल का पंकज सब्ज़ी बेचा करता था। एक पुलिस की जिप्सी रोज़ उसके सामने से होकर गुज़रती थी और उससे फ्री में पुलिस वाले सब्ज़ी की मांग किया करते थे।

जयपुर। पुलिस के द्वारा मुफ्त का माल या मुफ्त की चीज़ें लेने जैसी घटनाएं हम पुरानी फिल्मों में देखा करते थे। हफ्ता के जैसे पुलिस आसपास के लोगों से कुछ भी खरीदती हुई दिखाई दे जाती थी और आसपास के लोग भय और डर से सामान मुफ्त में दे भी देते थे। ऐसा फिल्मों में ही नहीं, असल कहानियों में भी होता था, जो कि मीडिया के फैले हुए ना होने की वजह से ज़्यादा पता नहीं चल पाता था।

लेकिन बिहार में ऐसा ही एक मामला आज के समय में आया है, जो कि बताती है कि जिस राज्य को किसी ज़माने में जंगलराज कहा जाता था, उसकी आज की भी दशा कैसी है और ये कहानी तो राजधानी पटना की है।
पटना में 14 साल का पंकज सब्ज़ी बेचा करता था।

पुलिस की जिप्सी रोज़ उसके सामने से होकर गुज़रती थी और उससे फ्री में पुलिस वाले सब्ज़ी की मांग किया करते थे। पंकज हर बार पुलिस वालों को मुफ्त में सब्ज़ी देने से मना कर देता था और पुलिस वाले उसे हर दिन देख लेने की बात करते थे।

पुलिस है और वो भी बिहार की। खुन्नस निकालना ही चाहते थे। 19 मार्च को पहुंच गए पंकज के पास और उसे पुलिस जिप्सी पर बिठाकर थाने ले गए और उसपर केस दर्ज किया कुछ और लड़कों के साथ। पंकज पर बाइक चोरी का इल्ज़ाम लगा दिया गया औऱ उसके नाम से एक पिस्टल, चार बाइक और कुछ रुपये मिलने की रिपोर्ट लिख दी।

पंकज के पिता को तब तक ये पता नहीं था कि उसके बेटे को किस वजह से गिरफ्तार किया गया है और वो पटना के अगमकुआं थाने के चक्कर लगाने लगे। 21 मार्च को पिता को पता चला कि उनके बेटे को बाइक चोरी के इल्ज़ाम में गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले के मीडिया तक पहुंचने के बाद खुद सीएम नीतीश कुमार ने जांच कमिटि बिठा दी और जब मामले से जुड़ा सच आया तो पूरे थाने को ही निलंबित कर दिया गया। पूरे थाने में पटना ज़ोन के आईजी नैयर हसनैन खान ने पूरे थाने में नए पुलिसकर्मियों को बिठा दिया है।

जांच में पता चला कि पुलिस ने बालिग कह कर पंकज को गिरफ्तार किया था, जबकि उसकी उम्र मात्र 14 साल है। पटना में ही एक किराए के मकान में रहने वाला पंकज का परिवार सब्ज़ी बेचकर अपना पालन-पोषण करता रहा है। पंकज को जेल से बाहर कराने के लिए उसके पिता के अब तक 2 लाख रुपये से ज़्यादा खर्च हो चुके हैं।

ये 2 लाख रुपये उन्होंने कर्ज के तौर पर लिये थे। उनकी एक छोटी बेटी है जो कि पहली कक्षा में पढ़ती है। इसके अलावा पंकज की हालत मानसिक रूप से बेकार हो चुकी है और वो बिल्कुल ही डरा हुआ है।

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