छत्तीसगढ़

राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के सभी टेंडर को निरस्त करने का किया फैसला

औद्योगिक नीति 2019-24 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमति दी गई

रायपुर: राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के सभी टेंडर को निरस्त करने का फैसला किया। साथ ही औद्योगिक नीति 2019-24 में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमति दी गई। जिसमें राज्य के वनोपज, हर्बल तथा वन पर आधारित अन्य उत्पादों का प्रसंस्करण, खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के निर्माण और मूल्य संवर्धन के कार्य राज्य में ही किए जाने को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज (वनांचल उद्योग पैकेज) का अनुमोदन किया गया, जिसके तहत लघु उद्योगों को औद्योगिक नीति 2019-24 के प्रावधान में स्थायी पूंजी निवेश अनुदान के स्थान पर, उत्पादन में आने के उपरांत उद्योगों को मान्य स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान के रूप में विशेषकर पिछड़े क्षेत्र विकासखण्डों जिसमें स श्रेणी के विकासखण्डों में कुल निवेश का 40 प्रतिशत 5 वर्षो में अधिकतम 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष तथा द श्रेणी के विकासखण्डों में कुल निवेश का 50 प्रतिशत 5 वर्षो में अधिकतम 50 लाख रुपये प्रतिवर्ष पात्रतानुसार देय होगा।

विशेष पैकेज के लिए लघु उद्योगों के द्वारा प्लांट एवं मशीनरी के अंतर्गत न्यूनतम 50 लाख तथा अधिकतम 5 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना आवश्यक होगा। छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम-2015 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसमें उद्योग विभाग द्वारा संचालित औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत उपकेन्द्रों की स्थापना हेतु न्यूनतम आवश्यक भूमि का आवंटन एक रुपये प्रतीकात्मक प्रीमियम राशि (टोकन मनी) पर बिना किसी लीज रेंट, सिक्यूरिटी डिपॉजिट के भूमि का आबंटन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं प्रबंधन नियम-2015 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसमें औद्योगिक भूमि, भवन, शेड, प्रकोष्ठ एवं लैण्ड बैंक से आबंटित भूमि का आबंटन पश्चात नियमन एवं प्रबंधन की कंडिका में संशोधन किया गया। जिसके तहत प्रब्याजी में 70 प्रतिशत के स्थान पर प्रब्याजी में 60 प्रतिशत से अधिक का वाक्यांश प्रतिस्थापित किया गया। इसके साथ ही कोविड-19 की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी औद्योगिक इकाईयां जिनके द्वारा उत्पादन प्रारंभ न किए जाने की स्थिति में तथा पट्टाभिलेख निरस्त होने की स्थिति में संबंधित आबंटित को प्रचलित प्रब्याजी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने पर उत्पादन प्रारंभ करने के लिए एक वर्ष की अतिरिक्त अवधि जो 31 अक्टूबर 2021 को समाप्त होगी।

सक्षम प्राधिकारी द्वारा सशर्त प्रदाय की जा सकेगी। यह सुविधा कोविड-19 की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मात्र एक बार उपलब्ध होगी, जिसे अन्य प्रकरणों में पूर्व उदाहरण के रूप में उपयोग नही किया जा सकेगा।

उक्त अवधि के पश्चात भी उद्यम में उत्पादन आरंभ न होने पर दी गई यह अतिरिक्त अवधि शून्य होगी तथा संबंधित इकाई पर छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 के मूल प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही की जा सकेगी। छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक-2020 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

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