पश्चिम बंगाल में सीबीआई को नो एंट्री, लेनी पड़ेगी राज्य सरकार की इजाजत

विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार पर लगाया आरोप

कोलकाता:

अधिसूचना के बाद अब सीबीआई को अपने अपने राज्य में छापे मारने तथा अदालत के आदेश के अलावा अन्य मामलों में किसी तरह की जांच करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी. विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के कारण राज्यों का उन पर से विश्वास कम हो रहा है.

हालांकि, बीजेपी ने इसे ‘भ्रष्ट दलों द्वारा अपने हितों के बचाव के लिए अधिकारों की स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण कवायद’ करार दिया. सीबीआई को अब इन राज्यों में अदालती आदेश वाले मामलों तथा केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ मामलों को छोड़कर शेष सभी में किसी तरह की जांच के लिए संबंधित राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी.

आंध्र प्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी की सरकार है जिसके मुखिया चंद्रबाबू नायडू हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी का शासन है. दोनों ही उन नेताओं में शामिल हैं जो 2019 के लोकसभा चुनावों में एकजुट होकर बीजेपी से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाने के लिए प्रयासरत हैं.

एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप- आंध्र सरकार
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (गृह) एनचिना राजप्पा ने कहा कि सहमति वापसी लेने की वजह देश की प्रमुख जांच एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोप हैं. ताजा सरकारी आदेश (जीओ) के अनुसार, ”दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 की धारा छह के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए,

सरकार दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को आंध प्रदेश राज्य में इस कानून के तहत शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल हेतु दी गई सामान्य रजामंदी वापस लेती है.” प्रधान सचिव (गृह) एआर अनुराधा द्वारा आठ नवंबर को इस संबंध में जारी एक ‘गोपनीय’ सरकारी आदेश गुरुवार की रात ”लीक” हो गया था .

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