प्रदेश सरकार अपने नाकारापन के चलते छत्तीसगढ़ को प्रशासनिक अराजकता की ओर धकेल रही : भाजपा

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा- आईने में अपने निकम्मेपन की छवि देखकर भी प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों से सबक लेने को क़तई तैयार नज़र नहीं आ रही है

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने सरगुजा ज़िले की कुन्नी पुलिस चौकी के प्रधान आरक्षक द्वारा एसडीओ(पी) पर पैसे लेकर पाँच आरोपियों को छोड़ देने के लगाए गए आरोप को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार में शासन-प्रशासन चलाने की सामर्थ्य नहीं रह गई है और अपने नाकारापन के चलते प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रशासनिक अराजकता की ओर प्रदेश को धकेल रही है। श्री सिंहदेव ने कहा कि यह घटना साफ़ आईने में प्रदेश सरकार को अपने निकम्मेपन की छवि दिखा रही है, लेकिन प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों से सबक लेने को क़तई तैयार नज़र नहीं आ रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में नौकरशाही पूरी तरह हावी हो गई है और सामंती-प्रवृत्ति के प्रतीक इन अफ़सरों पर प्रदेश सरकार का कोई नियंत्रण रहीं रह गया है। हालात इतने शर्मनाक हो चले हैं कि अपने से बड़े अफ़सरों के भ्रष्टाचार और अफ़सरशाही के अहंकार के ख़िलाफ़ मातहत लगातार मुखर होकर सामने आ रहे हैं। श्री सिंहदेव ने कहा कि एक कलेक्टर के हालिया आचरण इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में निरंकुश अफसरशाही चल रही है। अफ़सरशाही पर नकेल कसने के बजाय शासन ख़ुद को बेबस महसूस करे और इसके लिए भी सत्तापक्ष भाजपा के ख़िलाफ़ प्रलाप करने लग गया! श्री सिंहदेव ने कहा कि अब पुलिस के प्रधान आरक्षक को ही अपने महकमे से इंसाफ़ नहीं मिल रहा है और उसे अपने अधिकारी के भ्रष्टाचरण के विरुद्ध मोर्चा खोलना पड़ा है, तो इसके मायने साफ़ हैं कि प्रदेश सरकार की नाकामियों से प्रदेश का पूरा तंत्र ही ध्वस्त हो चला है और प्रदेश में चहुँओर या तो सत्तापक्ष की नौटंकियाँ चल रही हैं या फिर अराजकता के उत्सव का शोर मच रहा है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि ऐसे हालात में आम आदमी का इस आपदा काल में जीना मुहाल हो गया है। कलेक्टर सरेराह निर्दोष लोगों को पीटें, मुख्यमंत्री से फर्जी कोविड सेंटर का उद्घाटन करा लें, एसडीएम (महिला अधिकारी) खुलेआम अपने मातहतों को वसूली, अपने घरेलू ख़र्च और वसूली के लिए प्रताड़ित करने के कारण चर्चा का केंद्र बनें, महकमों में व्याप्त अफ़सरशाही के अहंकार में डूबे लोग मातहतों से घरेलू नौकरों का काम लें और धमतरी के एक आरक्षक को इसीलिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़े, अपने महकमे के भ्रष्टाचार को लेकर मुखर टिप्पणियाँ करने वाले एक आरक्षक की संदिग्ध स्थितियों में मौत हो जाती है, भ्रष्टाचार जिस अफ़सरशाही की रग-रग में व्याप्त है, उसमें अपने ज़मीर के साथ काम करने वाले एक अधिकारी को भ्रष्टाचार की जाँच के लिए अनशन तक करना पड़े, कुन्नी के प्रधान आरक्षक अपनी बाइक को जलाने वाले पाँच आरोपियों को न छोड़ने के लिए आरोपियों से ज़्यादा पैसे देने की पेशकश अपने एसडीओ(पी) को करनी पड़े, इससे ज़्यादा शर्मनाक प्रदेश की कांग्रेस सरकार के लिए और क्या हो सकता है? इन सबके बाद प्रदेश सरकार को तो सत्ता में एक पल भी रहने का अधिकार नहीं रह जाता है।

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