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धोनी के क्रिकेट करियर की वो कहानी जो फिल्म में भी नहीं दिखाई गई

किरमानी ने एक इंटरव्यू में खोला राज

महेंद्र सिंह धोनी उन खिलाड़ियों में से हैं जिनके करियर पर फिल्म बन चुकी है. फिल्म में तमाम ऐसी कहानियां थीं जो लोगों को नहीं पता थीं. धोनी के सेलेक्शन से लेकर, नौकरी की उनकी जद्दोजेहद और अफेयर तक सब कुछ लोगों ने जाना.

लेकिन अब भी एक कहानी अनसुनी रह गई थी. जिसपर से पर्दा उठाया टीम के पूर्व विकेटकीपर सैयद किरमानी (Syed Kirmani) ने. एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं बताया कि धोनी का सेलेक्शन कैसे हुआ था”. इसके बाद उन्होंने सेलेक्शन की इनसाइड स्टोरी बताई.

दिलचस्प बात ये है कि जिन लोगों ने एमएस धोनी (MS Dhoni) पर बनी फिल्म देखी है उन्हें याद होगा कि फिल्म में वो वाकया दिखाया गया है जब एक मैच में जिस तरफ सेलेक्टर बैठे हुए थे उसी तरफ धोनी बड़े बड़े शॉट्स लगा रहे थे. लेकिन कहानी इससे पीछे की भी है. जो फिल्म में नहीं दिखाई गई. आपको वही कहानी बताते हैं.

किरमानी ने एक इंटरव्यू में खोला राज

1983 में भारत को पहला विश्वकप (World Cup 1983) दिलाने वाली टीम में सैयद किरमानी विकेटकीपर थे. बाद में वो भारतीय टीम के चीफ सेलेक्टर भी थे. धोनी का सेलेक्शन जब हुआ तो किरमानी ही चीफ सेलेक्टर हुआ करते थे.

किरमानी ने एक इंटरव्यू में कहा- “मैं और ईस्ट जोन के सेलेक्टर प्रणब रॉय रणजी ट्रॉफी का एक मैच देख रहे थे. बात काफी पुरानी हो गई इसलिए मुझे ये याद नहीं कि वो मैच कौन सा था लेकिन रॉय इस बात के गवाह हैं.

प्रणब रॉय ने मुझसे कहा कि झारखंड का एक विकेटकीपर बल्लेबाज है जो काफी ‘प्रॉमिसिंग’ है. इस पर मैंने उनसे पूछा- क्या वो इस मैच में कीपिंग कर रहा है. प्रणब ने बताया कि- नहीं, लेकिन वो फाइन लेग पर फील्डिंग कर रहा है. इसके बाद ही मैंने धोनी के पिछले दो साल के ‘स्टैट्स’ मंगाए.

तब मुझे लगाकि वाह ये कमाल की ‘कंसिसटेंसी’ से बल्लेबाजी कर रहा है. मैंने धोनी की कीपिंग देखे बिना ही उसे ईस्ट जोन के लिए सेलेक्ट कर लिया. इसके बाद की कहानी इतिहास में दर्ज है.

धोनी को कप्तान चुना जाना भारतीय क्रिकेट का सबसे अच्छा लम्हा

सैयद किरमानी ने कहाकि कप्तान को सलाह देने के लिहाज से सबसे अच्छी नजर विकेटकीपर की होती है. धोनी को जब कप्तान बनाया गया तो वो भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे अच्छी बात थी.

पहले ऐसा लगता था कि धोनी को कप्तानी दिए जाने पर वो दबाव में आ जाएंगे और उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन धोनी ने इस राय को गलत साबित किया. धोनी बाद में भारत के सबसे कामयाब कप्तान बने.

उन्होंने 2007 में भारत को टी-20 विश्व कप में जीत दिलाई. इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम दुनिया की नंबर एक टीम बनी. 2011 में उन्होंने भारत को विश्व कप दिलाया. उन्होंने भारत के लिए 90 टेस्ट मैच खेले. 350 वनडे मैच खेले. 98 टी-20 मैच खेले. टेस्ट क्रिकेट में 4876 रन उनके खाते में है. 10773 रन उन्होंने वनडे में बनाए हैं.

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