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‘न्यूटन’ बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र के एक ऐसे दुर्गम पोलिंग बूथ की कहानी

65वें राष्ट्रीय पुरस्कार में मिला बेस्ट हिंदी फिल्म का अवार्ड

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में फिल्माई गई फि ल्म ‘न्यूटन’ को 65वें राष्ट्रीय पुरस्कार में बेस्ट हिंदी फिल्म का अवार्ड मिला है। राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘न्यूटन’ की कहानी अपने आप में बेहद अनोखी और काफी संवेदनशील है। यह नक्सलवाद के साए में मनाए गए लोकतंत्र के ऐतिहासिक पर्व की कहानी है। बता दें कि फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि दुनिया के सामने नक्सलवाद के खिलाफ कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी से लोकतंत्र की जंग जीतने की कहानी को पेश किया है।

फिल्म ‘न्यूटन” में बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र के एक ऐसे दुर्गम पोलिंग बूथ की कहानी दिखाई गई है, जहां पहुंचना काफी मुश्किल है। यहां सिर्फ 76 मतदाता हैं और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए की गई कवायदें दिखाई गई हैं।

कहानी में न्यूटन नाम के किरदार ने एक ऐसे सरकारी नौकर का चेहरा दिखाया है जो नक्सलवाद जैसी बड़ी समस्या का एकमात्र समाधान लोकतंत्र के पर्व यानी चुनाव और सुशासन को मानता है। इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें राजकुमार राव, संजय मिश्रा और पंकज त्रिपाठी जैसे बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय आदिवासियों ने काम किया है। ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने जिन्दगी में कभी कैमरा फेस नहीं किया था।

फिल्म में गोंडी भाषा का प्रयोग

इस फिल्म में स्थानीय आदिवासियों की भाषा गोंडी का प्रयोग किया गया है। जंगल में मुनादी से लेकर इलेक्शन के दौरान ग्रामीणों को निर्देश देने के लिए इस भाषा का प्रयोग फिल्म में किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब बॉलीवुड की किसी फिल्म में स्थानीय आदिवासियों की भाषा सुनने को मिली है। इस फिल्म में नक्सल क्षेत्र में काम कर रहे एसपीओ और ग्रामीणों के बीच के संवाद गोंडी भाषा में हैं।

बस्तर के इन लोगों ने निभाया है किरदार

फिल्म में कोंडागांव के रहने वाले खिरेंद्र यादव ने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है। उनके साथ ही बैलाडिला के मंगल कुंजाम, इशरार, मनधर, नीलधर, दुर्जन और सुकली जैसे स्थानीय युवाओं ने फिल्म में अलग-अलग किरदार निभाए हैं।

‘न्यूटन” को आस्कर के लिए भारत की ओर को किया था नामंकित

रिलीज के साथ ही राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘न्यूटन” आॅस्कर फिल्म समारोह में विदेशी सिनेमा सेक्शन के लिए भारत की ओर से ‘न्यूटन” की आॅफिशियल एंट्री के लिए चुना गया था। बता दें कि, हर साल जूरी उस फिल्म को चुनती है, जो भारत की तरफ से आॅस्कर में आॅफिशियल एंट्री लेती है।

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