जीएसटी के प्रावधानों के विरोध में बंद रहा प्रदेश, कांग्रेस का मिला समर्थन

रायपुर: छत्तीसगढ़ में जीएसटी के प्रावधानों के विरोध में शुक्रवार को चेम्बर ऑफ कामर्स ने बंद का आह्वाहन किया। इस दौरान प्रदेश के दवा व्यापारियों को छोड़कर सभी व्यापारिक संस्थानें बंद रही। इस दौरान दवा व्यापारियों को चेम्बर ने अतिआवश्यक सेवा के कारण बंद करने समर्थन नहीं मांगा।
चेम्बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अमर परवानी ने वीएनएस से चर्चा में बताया कि, चेम्बर ऑफ कॉमर्स जीएसटी का नहीं बल्कि उसके कई प्रावधानों का विरोध कर रही है। उन्होंने बताया कि, जीएसटी में व्यापारी को सजा की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। ई व्यय बिल व्यापारी पर लागू न हो। प्रतिमाह रिटर्न के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न हो। विक्रेता यदि जीएसटी जमा नहीं करता है तो खरीददार की जिम्मेदारी न हो। एक सूत्रीय सरल जीएसटी की आवश्यकता, जिसमें कर की उच्चतम दर 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो।
उन्होंने जानकारी दी कि, वर्तमान में फर्शी उद्योग को शासन ने ग्रेनाइट व मार्बल उद्योग की श्रेणी में मानकर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है जो सर्वथा अनुचित व अव्यवहारिक है। व्यापारी विकास पेनल ने शासन से मांग की है कि, फर्शी उद्योग पर जो पूर्व में टैक्स फ्री था, उसे यथावत रखा जाए। यदि टैक्स छूट असंभव हो, तो 5 प्रतिशत टैक्स लगाकर फर्शी उद्योग को राहत दी जाए व मार्बल उद्योग पर 5 प्रतिशत टैक्स से 28 प्रतिशत न कर तथा उसे यथावत रखकर मार्बल उद्योग को राहत दी जाए।
परवानी ने जानकारी दी कि, वर्तमान में प्रदेश में फर्शी पत्थर उद्योग की 1500 खदानें है, जो बंद होने की कगार में आ जाएगी। फर्शी पत्थर प्रदेश तथा पूरे देश में गरीब, किसान, मजदूर व छोटे तबके के आम नागरिकों द्वारा उपयोग में लाया जाता है। 28 प्रतिशत टैक्स लगने पर गरीब तबके पर आर्थिक बोझ आ जाएगा।

संरक्षक ने जताया विरोध
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स के बंद का संगठन के संरक्षक और विधायक श्रीचंद सुन्दरानी ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि, देश में 30 जून को संसद में जीएसटी की लांचिंग हो रही है, जिस पर देश भर में जश्र मनाया जाएगा। ऐसे समय में व्यापारियों के बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है।
सुन्दरानी ने जानकारी दी कि, पिछले चार महिनों से जीएसटी के प्रावधानों पर काम चल रहा है। कोई ऐसा संशोधन नहीं हुआ है, जिससे कि व्यापारियों को परेशानी हो। अगर कोई समस्या थी तो उसका निराकरण भी हो सकता है।

प्रदेश का व्यापार स्वफूर्त बंद रहा : पारवानी
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आव्हान पर छत्तीसगढ़ बंद का व्यापक असर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि, हम जीएसटी का स्वागत करते है परंतु इसकी विसंगतियां दूर करने के लिये हमें केन्द्र शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिये सांकेतिक आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है । पारवानी के अनुसार जीएसटी पंजीयन से लेकर जीएसटी को समझने तक के लिये हमने पूरे प्रदेश में कार्यशालाओं व कैम्पों के माध्यम से वाणिज्य कर विभाग को पूर्ण सहयोग दिया। इसलिये कि जीएसटी के रूप में चेम्बर की दशकों पूर्व मांग एक राष्ट्र, एक विधान, एक कर पूरी होने जा रही है। परंतु जीएसटी के कुछ कठिन नियमों में परिवर्तन के लिये हमने केन्द्र शासन को पूर्व में सुझाव भी भेजे थे उस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है । कुछ नये कड़े नियम पिछले कुछ दिनों से केन्द्र शासन द्वारा नोटिफिकेशन के माध्यम से लागू किये गये है उनसे भी व्यापारियों को कष्ट होगा।

कांग्रेस ने किया समर्थन
केंद्र की मोदी सरकार आधी अधूरी तैयारी के साथ पूरे देश मे जीएसटी को लागू कर दिया। जीएसटी लागू होने के बाद उत्पन्न होने वाले विकट परिस्थियों से भयभीत आशंकित व्यापारीयो की संगठन छ ग चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने विरोध जताते हुए आज प्रदेश भर में व्यापार बन्द का ऐलान किया था। व्यापारियों के परेशानियो दिक्कतों को सही ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव ने चेम्बर के बंद को समर्थन किया।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष विकास उपाध्याय कार्यकर्ताओ के साथ राजधानी के टाटीबंध,पचपेड़ी नाका, सुंदरनगर,आमानाका तेलीबांधा, सदरबाजार,मालवीय रोड शारदा चौक, स्टेशन चोक फाफाडीह,गुढ़ियारी,संजय नगर के क्षेत्रों में घूम घूमकर व्यापारियों से दुकान बंद करने अपील किये।

व्यापारियों के जख्म पर नमक छिड़कने का उत्सव : कन्हैया
रायपुर: कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि, भाजपा की सरकार बनाने के लिए जी जान लगाने वाले व्यापारी वर्ग को मोदी सरकार ने GST के रूप में रिटर्न गिफ्ट दिया है। आज का जश्न व्यापारियों के जख्मों पर नमक का छिड़काव जैसा है।
उन्होंने कहा कि, बगैर पूरी तैयारी के सरकार ने GST लागू करने का फैसला कर व्यापार जगत को संकट में डाल दिया है। पेट्रोल और शराब को एक राष्ट्र एक कर में शामिल करना था।

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