9 साल में 50 बार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, जारी करना पड़ा NRC ड्राफ्ट

अभिजीत शर्मा प्रदीप कुमार भुइयां ने लगाई थी याचिका

नई दिल्लीः असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे ड्राफ्ट के बाद जहां 40 लाख से ज्यादा लोगों की नागरिकता पर तलवार लटक रही है, वहीं इस ड्राफ्ट से एक बड़ा तबका खुश है और अभिजीत शर्मा की मेहनत को सलाम कर रहा है। 44 साल के शर्मा एक बिजनेसमैन हैं और असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) नामक एक गैर-सरकारी संगठन के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने एनआरसी की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई और उसमें जीत हासिल की। साल 2009 से अब तक शर्मा इन नौ सालों में कुल 50 बार सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगा चुके हैं।

उन्होंने 20 जुलाई 2009 को सुप्रीम कोर्ट में एनआरसी अपडेट करने की याचिका दायर की थी। फिर साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा की याचिका पर फैसला दिया कि सरकार 31 जनवरी, 2016 तक एनआरसी को अपडेट कर प्रकाशित करे। साल 2010 में एनआरसी को अपडेट करने का काम रुक गया था लेकिन दिसंबर 2014 में मोदी सरकार को जब सुप्रीम कोर्ट ने लपेटा तो फिर से इसमें तेजी आई और अब 30 जुलाई, 2018 को एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट पब्लिश हो सका।

1971 से पहले से असम में रहने का सबूत करना होगा पेश : दूसरा ड्राफ्ट पब्लिश होने के बाद 40 लाख से ज्यादा उन लोगों (जिनके नाम दूसरी सूची में भी नहीं हैं) को कहा गया है कि वो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रहने का सबूत पेश करें ताकि उन्हें एनआऱसी में शामिल किया जा सके। जिन लोगों का नाम उसके बाद भी बच जाएगा, उनके बारे में फिलहाल कोई फैसला नहीं किया गया है लेकिन अफवाहों का दौर जारी है। इधर, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता अभिजीत शर्मा खुश हैं। उनकी मुहिम रंग लाई। वैसे शर्मा ने इस पहल के लिए एक बुजुर्ग दंपती और एक सरकारी अधिकारी के प्रति आभार जताया है। बतौर अभिजीत शर्मा प्रदीप कुमार भुइयां ने साल 2009 में एक याचिका का मसौदा तैयार कर उन्हें सौंपा था और सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने के लिए प्रेरित किया था।

प्रदीप कुमार भुइयां, उनकी पत्नी बनती भुइयां और सरकारी अधिकारी नब कुमार डेका बरूआ की वजह से एनआरसी का पूर्ण मसौदा तैयार हो सका। उनके प्रोत्साहन से ही अभिजीत शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एनआरसी को अपडेट करने की अपील की थी। भुइयां दंपती ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानूनी लड़ाई पर अपनी जेब से मोटी रकम भी खर्च की है। भुइयां दंपती ने भी एनआरसी के नतीजे पर तो संतोष जताया है लेकिन इसका श्रेय लेने से इनकार कर दिया है। भुइयां ने इसे असम आंदोलन (1979-85) के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि करार दिया है।

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