सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम,क्या रुकेंगे बच्चों के खिलाफ अपराध…?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 18 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार माने जाने का ऐतिहासिक फैसला दिया है. यह फैसला निश्चित ही बच्‍चों के लि‍ए दुरूह परि‍स्‍थि‍ति‍यों में एक नई लकीर खींचने जैसा है. भारत जैसे देश में, जहां बच्चों से संबंधित तमाम मापदंड इतने गंभीर रूपों में व्याप्त हैं, वहां इसका असर बहुत दूरगामी होने वाला है, लेकिन इस फैसले के पहले के कई और पड़ाव हैं, जिन्हें हल किए बिना बच्चों को सम्मान और सुरक्षा देना वास्तव में मुश्किल ही होगा. देखा जाए तो इस फैसले के लागू किए जाने के पहले ही देश के एक और कानून ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’ का उल्लंघन हो चुका होता है. इसका उल्‍लंघन करने पर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं, लेकिन हर साल सरकार खुद ही यह बताती है कि उसने देश में लाखों बाल विवाह होने से रोके हैं. इसका मतलब तो यही है कि कम उम्र में बच्चों का विवाह इस देश का एक भारी संकट है, जिसे सुधारना कभी प्राथमिकता में नहीं रखा गया है.
यह फैसला इसलि‍ए और महत्‍वपूर्ण बन गया है, क्‍योंकि‍ यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर आया है. फैसले में कहा गया है कि‍ यह अपराध होने पर नाबालिग पत्नी को एक साल के अंदर शिकायत दर्ज करानी होगी. अदालत ने कहा है कि शारीरिक संबंधों के लिए उम्र 18 साल से कम करना असंवैधानिक है. यह फैसला आईपीसी की उस धारा 375 (2) के संदर्भ में है, जिसमें कहा गया है कि अगर 15 से 18 साल की बीवी से उसका पति संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नही माना जाएगा, जबकि बाल विवाह कानून के मुताबिक शादी के लिए महिला की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए.

यह ठीक है कि नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और बेहतर जीवन के लिए यह फैसला एक हथियार होगा, लेकिन देखना यह भी होगा कि बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए बनाए गए कानून कैसे हैं, और ज़मीनी सच्चाई क्या है. क्या आप ऐसे कुछ उदाहरण बता सकते हैं कि देश में बाल विवाह करवाने पर कानून के तहत दो साल की सजा और एक लाख का जुर्माना किया गया अथवा बाल श्रम जैसे कठोर कानून होने पर भी बच्चे आज भी काम पर क्यों जा रहे हैं.

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