त्रासदी – पानी में बह न जाए इसलिए सीढ़ियों से बांध दिया था पति का शव

मदद के लिए शोशम्मा अब्राहम करती रहीं इंतजार

कोच्चि। केरल में आयी विनाशकारी बाढ़ का पानी अब उतर गया है और अपने पीछे विनाश के गहरे निशान छोड़ गया है। आपदा की इस घड़ी से उबरने में केरल को लंबा वक्त लगेगा। लेकिन इस बाढ़ ने कई लोगो को जीवनभर के लिए ऐसा दर्द दे दिया है, जिससे उबरना लोगों के लिए बेहद मुश्किल होगा। ऐसा ही एक मामला है शोशम्मा अब्राहम का।
केरल के पान्दानाद गांव में रहने वाली शोशम्मा के पति की मौत केरल की बाढ़ में हो गई थी। बाढ़ के दौरान हालात इतने खराब थे कि शोशम्मा को अपने पति का शव पानी में तैरता मिला था और शोशम्मा ने शव को घर की सीढ़ियों से बांध दिया था, ताकि बाढ़ के पानी में शव बह ना जाए। बाद में रेस्कयू टीम शोशम्मा के घर पहुंची, लेकिन उनकी परेशानी यहीं पर खत्म नहीं हुई। दरअसल शनिवार को जब शोशम्मा अलप्पुझा के मेडिकल कॉलेज पहुंची तो उनके पति का शव प्लास्टिक शीट में लिपटा हुआ पार्किंग में खड़ी एंबुलेंस में ही रखा हुआ था और किसी ने भी इस शव को छुआ तक नहीं था।

चेंगान्नूर शहर के करीब स्थित पान्दानाद गांव सर्वाधिक प्रभावित
बता दें कि केरल के चेंगान्नूर शहर के करीब स्थित पान्दानाद गांव उन इलाकों में शामिल है, जो केरल में आयी बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। शोशम्मा और उनके पति अब्राहम भी इसी गांव में रहते थे। बीती 15 अगस्त को उनके दोमंजिला मकान में पानी भरना शुरू हुआ। इसके बाद देर रात तक पानी का लेवल काफी ऊपर तक आ गया। इस पर शोशम्मा और उनके पति अब्राहम पहली मंजिल पर चले गए। शोशम्मा ने बताया कि अब्राहम पड़ोसियों का हाल-चाल जानने के लिए छाती तक भरे पानी में घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। एक-दो घंटे बाद जब वह वापस नहीं लौटे तो मैं उन्हें ढूंढने बाहर निकली, तो उनका शव पानी में तैरता मिला। इसके बाद चचेरे भाई की मदद से मैंने शव को सीढ़ियों से बांध दिया था। इसके बाद शोशम्मा समय समय पर नीचे उतरकर यह चेक करती रहती थीं कि शव बह तो नहीं गया है।

अधिकारियों, हेल्पलाइन से भी नहीं मिल सकी मदद
शोशम्मा इस दौरान मस्कट में रहने वाले अपने बेटे जोजो अब्राहम के साथ फोन पर संपर्क में रहीं। जोजो का कहना है कि हमने अधिकारियों, हेल्पलाइन कार्यकतार्ओं से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिल सकी। जोजो ने कहा कि उनके पिता का शव तीन दिनों तक एंबुलेंस में रखा रहा और इससे बुरा क्या हो सकता है। इतना ही नहीं जोजो और उनके परिजनों ने ही शव को साफ किया और शव का अंतिम संस्कार कराया। वहीं इस घटना से दुखी शोशम्मा का कहना है कि उनका शव उसी प्लास्टिक में रखा हुआ था, जिसमें मैंने उसे लपेटा था। बॉडी सड़ने लगी थी और उसमें से बदबू आ रही थी। वह इसके हकदार नहीं थे। इतना कहते ही शोशम्मा रोने लगीं।

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