नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मांगा 6 महीने का वक्त

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में 9 जनवरी, 2022 तक का वक्त मांगा

नई दिल्ली:केंद्र सरकार द्वारा साल 2019 में नागरिकता संशोधन एक्ट को पेश किया गया था. इस कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से आने वाले हिन्दू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत में नागरिकता दी जा सकेगी.

केंद्र सरकार के इस कानून का देश के अलग-अलग हिस्सों में जमकर विरोध हुआ था, साथ ही विपक्ष भी इस कानून के खिलाफ था. हालांकि, बिल के कानून का रूप लेने के बाद ही देश में कोरोना वायरस की एंट्री हो गई थी, ऐसे में सरकार ने कानून बनाने के लिए लंबा वक्त मांगा था.

वाही सीसीए के नियम अभी तक तैयार नहीं हो पाए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में इसकी जानकारी दी है, साथ ही नियमों को गढ़ने के लिए अतिरिक्त 6 महीने का वक्त मांगा गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में 9 जनवरी, 2022 तक का वक्त मांगा है ताकि नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत नियमों को तैयार किया जा सके.

लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सवाल पूछा था कि क्या केंद्र सरकार ने CAA के नियमों को नोटिफाई करने की कोई अंतिम तारीख तय की है. अगर हां तो वो क्या हैं, अगर नहीं तो अभी तक क्यों नहीं की गई हैं.

इसी के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा है कि CAA को 12.12.2019 को नोटिफाई किया गया था, 2020 में ये कानून का रूप ले चुका है. लेकिन लोकसभा और राज्यसभा की कमेटियों से इस कानून के तहत नियम तैयार करने के लिए जनवरी, 2022 तक का वक्त मांगा गया है.

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