सांस्कृतिक हब के रूप में संग्रहालय का हो उपयोग- डॉ. ओता

‘अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस‘ पर महंत घासीदास संग्रहालय में व्याख्यान कार्यक्रम

रायपुर : राज्य सरकार के संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय द्वारा महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर में ‘अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस‘ पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रायपुर मण्डल के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली के पूर्व संयुक्त महानिदेशक डॉ. एस. बी. ओटा, विशिष्ट अतिथि पद्मश्री सम्मान प्राप्त ए.के. शर्मा और संस्कृति विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता की उपस्थिति में किया गया।

इस अवसर पर डॉ एस. बी. ओता ने कहा कि संग्रहालय को शिक्षण संस्थान के रूप में उपयोग करना चाहिए, परंतु वर्तमान में लोग संग्रहालय को सिर्फ एक भ्रमण स्थल के रूप बहुत कम समय देते हुए विजिट करते है, जबकि इस स्थल में ज्ञान का बहुत सारा सामान मौजूद रहता है।

म्यूजियम को सांस्कृतिक हब के रूप में उपयोग किया जा सकता है और पुरातत्व एवं इतिहास को नुक्कड़ नाटक फॉर्म में प्रदर्शित कर स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही फ्रेंड ऑफ म्यूजियम के रूप में संग्रहालय के कामों में रुचि रखनेवाले आम आदमी को जोड़ते हुए वालिंटियर की तरह कार्य लिया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद पद्मश्री ए. के. शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि लोगों में पुरातत्व के प्रति रुचि है, लेकिन धीरे धीरे यह रुचि कम होते जा रही है। पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण किया जाना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के समान जिलों में भी इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजन किया जाना चाहिए। साथ ही पुरातत्ववेत्ताओं को भी महत्व देने की बात उन्होंने कही।

ज्ञात हो कि वर्ष 1992 से अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस का आयोजन 18 मई को अंतरराष्ट्रीय कॉउन्सिल ऑफ म्यूजियम के द्वारा किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष एक नए थीम पर कार्य किया जाता है। इस वर्ष ‘म्यूजियम एज कल्चरल हब्स दी फ्यूचर ऑफ ट्रेडिशन’ के नाम से मनाया जा रहा है।

कार्यक्रम के अवसर पर सचिव डॉ. एम. गीता ने कहा कि पुरातत्व विभाग जनता को पुरातात्विक विरासत से जोड़ते हुए सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रही है। रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय को देश के 10 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालय में गिना जाता है,जो सम्मान की बात है।

प्रदेश की संस्कृति विभाग सहपीडिया संस्था के साथ छत्तीसगढ़ के पुरातत्विक धरोहर के 32 सीरीज बनाया गया है और भी धरोहरों पर सीरीज बनाया जा रहा है। विभाग प्रदेश के सभी प्रकार की संस्कृति का विकास कार्य कर रही है।

साथ ही संग्रहालय के विकास के आम जनता का सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंचल में प्राचीन स्थापत्य और शिल्पाकृतियों में सांस्कृतिक समन्वय की प्रवृत्ति दिखाई देती है।

व्याख्यान सत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त पुरातत्ववेता डॉ. एस.एस. गुप्ता (भोपाल) और पुरातत्व संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एस.के. मंजुल के साथ एल.एस निगम और अशोक तिवारी ने भी विषय पर व्याख्यान दिए।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा मंहत संग्रहालय के संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया गया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिया गया। साथ ही सामाजिक संस्था महावीर इंटर कॉन्टिनेंटल के पदाधिकारियों द्वारा उपस्थित अतिथियों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय के आयुक्त अनिल कुमार साहू ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य एक सांस्कृतिक केन्द्र और भविष्य में परम्पराओं के संवाहक के रूप में संग्रहालयों के महत्व एवं उपादेयता के प्रति सर्वजन में जागरूकता का विकास एवं प्रसार करना और सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक धरोहरों के महत्व, उनकी स्वच्छता, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति सभी में उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना है।

कार्यक्रम में प्रभारी अधीक्षण पुरातत्ववेत्ता रायपुर मंडल डॉ. मनोज कुर्मी सहित अनेक इतिहासकार, पुरातत्ववेता, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी सहित जिला पुरातत्व संघों के सदस्य एवं संग्रहालय, संस्कृति में रूचि रखने वाले प्रबृद्ध नागरिक सहित संस्कृति विभाग, मंहत घासीदास संग्रहालय तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण रायपुर मंडल के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

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