निष्पक्ष निर्वाचन के लिए आदर्श आचरण संहिता के विभिन्न पहलुओं को अधिकारियों ने समझा

निर्वाचन के दौरान मीडिया का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने प्रमाणन समितियां होंगी सक्रिय

रायपुर: निर्वाचन के दौरान आदर्श आचरण संहिता का पालन सुनिश्चित कराने में संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। हर स्तर के अधिकारी आचार संहिता के सभी पहलुओं को जाने तभी नियमों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा। लोकसभा निर्वाचन की तैयारियों की कड़ी में आज आदर्श आचरण संहिता और मीडिया प्रमाणन तथा निगरानी समिति के सभी जिलों के नोडल अधिकारियों और मास्टर ट्रेनरों का एक दिवसीय प्रशिक्षण हुआ।

प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर तथा उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीकांत वर्मा, मास्टर ट्रेनर पुलक भट्टाचार्य, सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मनीष मिश्रा एवं शारदा अग्रवाल ने एमसीसी तथा एमसीएमसी से संबंधित विभिन्न तकनीकी तथा व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला। मास्टर ट्रेनर श्रीकांत वर्मा तथा पुलक भट्टाचार्य ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन की घोषणा होते ही आदर्श आचरण संहिता लागू हो जाती है। इस स्थिति में प्रशासनिक अधिकारी निर्वाचन होने तक यह सुनिश्चित करें, कि इस दौरान किसी भी शासकीय भवन, शासकीय मशीनरी का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों के लिए न हो। इस दौरान पैसे के बड़े पैमाने पर लेन-देन, जुलूस, राजनीतिक सभा, समारोह की रिकार्डिंग, आपत्तिजनक भाषा में राजनीतिक भाषण, वाहनों की अनाधिकृत आवाजाही, प्रचार सामग्री के परिवहन सहित अन्य विषय जो सीधे अथवा परोक्ष रूप से निर्वाचन गतिविधि के तहत संपन्न हो रही है, ऐसे सभी कार्यों पर आदर्श आचरण संहिता के तहत निगरानी रखें।

आचार संहिता उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासनिक अधिकारी का दायित्व है। प्रशिक्षण के दौरान वाहनों के उपयोग, विश्राम भवनों तथा स्कूल भवनों के उपयोग जैसे विषयों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों को स्पष्ट तौर बताया गया। प्रचार के दौरान होने वाले खर्च तथा इसके लिए ली जाने वाली अनुमतियों के संबंध में प्रशिक्षण में चर्चा हुई। आदर्श आचरण संहिता के व्यापक दायरे तथा अधिकारियों के दायित्वों और सीमाओं पर नोडल अधिकारियों तथा मास्टर ट्रेनरों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। निर्वाचन के दौरान मीडिया प्रमाणन तथा निगरानी समितियों की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए श्रीकांत वर्मा ने बताया कि म़ीडिया का प्रभाव निर्वाचन के दौरान लगातार बढ़ा है। ऐसे में इसके दुरूपयोग को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एमसीएमसी के जरिए समाज में राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार के तरीकों पर नजर रखी जाती है। इससे स्वतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन के लिए स्वस्थ वातावरण को बनाए रखा जा सका है। निगरानी समिति के दायित्वों का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में अन्य प्रशासनिक लोगों के साथ समन्वय कर इसे और प्रभावी तथा कारगर बनाया जा सकता है। इसके लिए प्रत्येक जिले में इलेक्ट्राॅनिक मीडिया, सोशल मीडिया, प्रिन्ट मीडिया सेल का गठन किया जाए। इलेक्ट्राॅनिक मीडिया में प्रसारित विज्ञापन बिना अधिप्रमाणन प्रसारित होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। संदिग्ध पेड न्यूज के प्रकरणों पर भी विशेष ध्यान देकर नियमानुसार कार्यवाही की जाए।

निर्वाचन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रचार-प्रसार के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन हो। एमसीएमसी समिति के पास पर्याप्त अधिकार है कि वो वातावरण को बिगाड़ने वाले प्रचार-प्रसार को रोक सके। आयोग के निर्देशों का अनुपालन नही करने वालों पर वैधानिक कार्रवाई का भी प्रावधान है। मीडिया के साथ समन्वय कर निर्वाचन की गतिविधियों से आम-जन को सजग किया जा सकता है। राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों को मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कराया जा सकता है।

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