मध्यप्रदेश

बंद पड़े हैंडपंप को सोलर पंप से जोड़कर गाँव ने किया कमाल, मिल रहा साफ पानी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) के माध्यम से ऊर्जा विकास निगम द्वारा सोलर वाटर पंप लगाए गए हैं।

बड़वानी जिले के पहाड़ी क्षेत्र में जहां ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए साल के नौ महीने बड़ी मशक्कत करना पड़ती है, वहीं पहाड़ में बसे एक फलिया (छोटी बसाहट) के लोगों को सालभर भरपूर पानी मिल रहा है।

पाटी विकासखंड के ग्राम पंचायत ठेंग्चा के डावरिया फलिया के लोगों ने बंद पड़े हैंडपंप को सोलर पंप से जोड़कर यह कमाल कर दिया। ग्रामीणों को जब चाहे तब पानी मिल रहा है।

सूरज उगने से लेकर अस्त होने तक हैंडपंप से सौर (सोलर) ऊर्जा से चलित पंप लगा होने से पानी निकलता है।

करीब 1200 की आबादी को सुलभ पेयजल किसी वरदान से कम नहीं है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) के माध्यम से ऊर्जा विकास निगम द्वारा सोलर वाटर पंप लगाए गए हैं।

गांव के रणपत और रिकेज ने बताया कि पहले घर की महिलाओं को नाले पर जाकर पानी लाना पड़ता था। जब हैंडपंप लगाया था तब कुछ महीने अच्छा पानी निकला लेकिन सालभर के भीतर ही पानी मिलना कम होने लगा।

गर्मी में तो हैंडपंप बंद हो जाता था। ऐसे में सरपंच की पहल व अधिकारियों के सहयोग के कारण जलसंकट से निजात मिली है। बिजली का अतिरिक्त खर्च नहीं होता और बिजली न होने से भी कोई परेशानी नहीं होती।

सरपंच नजरिया सोलंकी ने बताया कि हैंडपंप में सोलर पंप लगने का प्रयोग तीन साल पहले किया गया था, यह सफल भी रहा।

हालांकि यहां पानी की टंकी नहीं होने से पानी व्यर्थ बहता है। हमारा प्रयास है कि टंकी बनाई जाए। इससे पानी सिंचाई में उपयोग आ सकेगा।

यहां सुधार की दरकार…50 में से 13 जगह सोलर पंप बंद पड़े

पीएचई विभाग के अनुसार जिले में 50 फलियों में लगे हैंडपंपों को सोलर पंप से जोड़ा गया है। इनमें से वर्तमान में 13 जगहों पर योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है।

एक सोलर पंप यूनिट की लागत करीब 3.7 लाख रुपए आई है। इस योजना में करीब एक करोड़ 16 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

एक्जिक्यूटिव इंजीनियर एचएस बामनिया ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी प्रयास से खासकर पहाड़ी क्षेत्र में ग्रामीणों की पानी की परेशानी दूर हुई है।

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