छत्तीसगढ़

गौ रक्षा में लीन आशीष दुबे एवं उनके साथियों की आवाज

हमारे छत्तीसगढ़ में पहाडी गायों का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर तड़प कर मरने के लिए बेबस है

ब्युरो चीफ : विपुल मिश्रा

संवाददाता: शिव कुमार चौरासिया
गौ प्रणाम सच तो यह है कि मानव अपने दानव होने के साथ- साथ हरामी,निच और स्वार्थी जैसे शब्द भी जोड़ लिया है क्युन्की दानवो में भी अपना रिवाज होता है जिसे वरना आज इन बेजुबानो को लगातार ऐसी तकलीफ नहीं देखनी पड़ती,आज तड़के सुबह 5:30 बजे भोर में हमारे सीनियर गौसेवक धीरेन्द्र यादव मामाजी और पंकज सचान का फोन आया की मंडी बेरियर के पास कोई लोड पीकप वाला बहुत तेज रफ्तार में इस बेचारी निरीह बछिया को जो सड़क किनारे बैठी हुई थी 4 बजे भोर में इसके ऊपर से गाड़ी चढ़ा कर भाग गया

इसके कमर का निचला हिस्सा गाड़ी के दबाव से पूरी तरह फट गया था अन्दर से खुन आ रहा था साथ ही बेचारी के नाक से भी खुन बह रहा था और हड्डी भी बाहर दिख रही थी तत्काल इसे आपातकालीन दवा की गई और तुरंत वेटनरी ले जाकर फटे हुए हिस्से में टांका लगवाया गया,,अभी महादेव की कृपा से वह स्वस्थ है और धीरेन्द्र यादव के यहाँ गांव में ही उसकी सुरक्षित देखरेख सेवा होगी,और उसके मालिक को दुबारा नहीं देंगे,,

बड़े पैमाने पर गौतस्करी

हमेशा गाड़ी वाले से कहीं ज्यादा दोष स्वार्थी गौपालको का होता है क्युन्की जब तक 6 महीने तक दुध पीते बछड़े या बछिया रहते हैं तब तक साले हरामखोर लोग टीका चन्दन पुजा करके दुध निकालते हैं,बाद में काम निकलने के बाद सीधे रोड पर छोड़ देते हैं,यही कारण है कि भारत में गौवंश तिल तिल कर तड़प कर मर रहे हैं,और बड़े पैमाने पर गौतस्करी भी इसी कारण बढ़ रही है क्युन्की गाय भैंसो को सड़क पर छोड़ना सबसे बड़ी लापरवाही है,,गौतस्करो को सबसे बड़ा मौका मिलता है यहीं से,,यह नियम गाँव शहर दोनो के लिए लागू होता है खासकर हाइवे पर,,

हमारे छत्तीसगढ़ में पहाडी गायों का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर तड़प कर मरने के लिए बेबस है,हाइवे में रायपुर से अम्बिकापुर के बीच वाड्रफनगर,रामानुजगंज,बलरामपुर,राजपुर,,,

जरही मोड़,,अम्बिकापुर,लखनपुर,उदयपुर,चोटीया,कटघोरा,चैतमा,पाली,रतनपुर,बिलासपुर,सिमगा से लेकर रायपुर,,और मनेन्द्रगढ़,बैकुंठ्पूर,सूरजपर,सीतापुर जैसे जगहों पर ही अगर रात में गिनती की जाए तो करीब 80000 के करीब गौवंश सड़को पर मिलते हैं जिसमें हफ्ते भर में करीब अलग अलग जगहों पर 50 से 100 गौवंश गाड़ी से चोटिल होते हैं,,और उतने ही संख्या में गम्भीर चोट से तड़प कर मरते हैं,,

जब हम स्वार्थी लोग अपनी गाय को ही सुरक्षित नहीं कर पा रहे हैं तो बाकी बेजुबान प्राणियो को क्या सुरक्षित कर पाएंगे।

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