हवाबाजों ने बनाया लॉक-डाऊन का ऐसा माहौल, शहरवासी भागे बाजार के ओर, आगे पढ़ें

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़। पिछले कुछ दिनों से रायगढ़ में कोरोना को लेकर प्रशासन सोशल मीडिया व न्यूज़ पेपरों में काफी गंभीर नजर आ रहा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए रायगढ़ जिले में 14 अप्रैल से 22 अप्रैल तक संपूर्ण लॉकडाउन का आदेश जारी हो चुका है। इसी बीच कुछ लॉकडाउन के हवाबाज जो सोशल मीडिया के माध्यम से लाक डाउन को बहुत ही लंबा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें यह आभाष भी नहीं था कि उनके द्वारा इस तरह से लॉकडाउन को लेकर किए जा रहे मस्ती मजाक का असर शहरवासियों पर कैसा पड़ेगा? क्योंकि विगत 2 दिनों से शहर में भीड़ इस कदर देखने को मिल रही है कि मानो दिवाली का त्यौहार आने वाला है क्योंकि 24 अप्रैल से बहुत सी शादियां भी होनी है। जिसका असर बाजार में देखने को मिला भीड़ का ऐसा आलम कि आपको पैदल सड़क पार करने में भी पसीने छूट जाएं।

प्रशासन अपने आदेश के अनुसार 6:00 बजे के बाद लोगों पर शक्ति बरतता नजर आता है लेकिन आज की स्थिति से निपटने प्रशासन के भी हाथ पैर ठंडे हो गए।

तथा बाजार में सारी दुकानों का सामान चाहे वह सब्जी हो या राशन समाप्त होता नजर आया और लोग काफी परेशान नजर आए। गंभीर प्रशासन कि कहीं कोई भूमिका नजर नहीं आई..? तो क्या सिर्फ आदेश देकर लॉकडाउन लगाना ही प्रशासन की जिम्मेदारी बन सी गई है या सिर्फ लोगों को लॉक डाउन का डंडा दिखाने में प्रशासन को अब मजा-सा आने लगा है?

यह लॉकडाउन के कुछ घंटे पहले किस शहर की तस्वीर बयां कर रही है.
पूरे शहर में मेले सी भीड़ भाड़ देखी जो करोना फैलाने के लिए सबसे उच्चतम और सफलतम मार्ग है। इस भयावह स्थिति से कोरोना की संख्या में कितनी वृद्धि होगी..? यह तो कोई नहीं जानता पर प्रशासन को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। क्योंकि सब जानते हैं, ऐसा पहले भी हो चुका है। रायगढ़ से पहले छत्तीसगढ़ के कई जिलों में यह स्थिति देखने को मिली पर ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय तथा राज्य प्रशासन कारगर तो क्या कोई उपाय भी नहीं कर पाया। कालाबाजारी पर भी प्रशासन का कोई खास चाबुक नहीं चला और कोई डर भी नहीं दिखा।

देखा जाए तो तथाकथित विद्वान इसका पूरा ठीकरा आम जनता जनार्दन पर ठोकेंगे! मगर आप समझिए अगर आपसे यह कहा जाए आपके आपके परिवार को 10 दिन तक बंद रखा जाएगा, अगर आप बाहर निकले तो डंडों से पीटा जाएगा या हो सकता है किसी अन्य तरीके से आपकी इज्जत का जनाजा निकाला जाए! जैसे आपने कोई संगीन जुर्म कर दिया हो! आपके पास कुछ दिन है.. आपके आंखों के सामने आपके परिवार का चेहरा दिखता है .. आप सोचते हैं इसी बीच अगर घर का राशन खत्म हो गया और जेब में पैसे भी हो तो आप क्या उखाड़ सकते हैं ..? कुछ नही..! आप सोचते हैं.. दुविधा में रहते हैं एक तरफ आपको बाजार में करोना का खौफ है और दूसरी तरफ यह समस्या..? तो आप क्या करेंगे। आप घर से निकलेंगे.. सवाल सिर्फ आपका नहीं आपके परिवार का भी है.. आबादी ज्यादा है, सबके साथ वही समस्या है। बाजार की सड़कें सकरी हैं, गिनती की दुकानें हैं.. छोटा सा बाजार है.. आपके पास सिर्फ एक आदेश है कोई सिस्टम नहीं..? आप डर के साए में घर से निकलते हैं और सोशल मीडिया में कोई आपकी तस्वीर खींचकर.. आपको अज्ञानी, मूर्ख, देशद्रोही, लापरवाह पता नहीं क्या क्या साबित कर देता है..

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