दुनिया का अजीबोगरीब देश जहां शादी से पहले कुंवारों को चुकाना पड़ता था टैक्स

कई देशों में कुंवारों पर टैक्स लगाने का इतिहास मिलता है जिसकी शुरुआत 9वीं सदी से होती

दुनिया में बाकी टैक्सों से हटकर कुछ अजीबोगरीब टैक्स लगाए गए हैं। जैसे आज ही के दिन यानी 20 दिसंबर, 1821 को अमेरिका के मिसूरी राज्य में कुंवारों पर टैक्स लगाया था।

कुंवारों को 1 डॉलर बैचलर टैक्स के तौर पर देना पड़ता था। इस टैक्स का मकसद लोगों को शादी के लिए प्रेरित करना था। वैसे सिर्फ मिसूरी ही ऐसा राज्य नहीं है जहां कुंवारों पर टैक्स लगाया गया था।

कई देशों में कुंवारों पर टैक्स लगाने का इतिहास मिलता है जिसकी शुरुआत 9वीं सदी से होती है। आइए आज जानते हैं कि दुनिया के और किन देशों में बैचलर टैक्स लगाया गया था।

रोम में टैक्स

रोम में 9वीं सदी में उस समय के सम्राट ऑगस्ट्स ने बैचलर टैक्स लगाया था। यह बैचलर टैक्स कुंवारों और विवाहित बेऔलाद दंपतियों के लिए था।

एक ओर जहां इसका मकसद लोगों को शादी और बच्चा पैदा करने के लिए प्रेरित करना था तो दूसरी ओर इसका एक मकसद अनैतिक व्यवहार को भी रोकना था। यह सरकार के लिए पैसा जुटाने का भी शानदार तरीका साबित हुआ।

एक बार फिर 1927 में इटली में बैचलर टैक्स लगा। उस समय मुसोलिनी इटली का शासक था। मुसोलिनी ने देखा कि यूरोप के अन्य देशों जैसे जर्मनी आदि की जनसंख्या काफी ज्यादा है और इटली उस मोर्चे पर पीछे था।

उसे लगा कि ऐसे में काफी पीछे रह जाएंगे। इसलिए उसने बैचलर टैक्स लगाकर एक तीर से दो निशाना साधा, लोगों को शादी के लिए मजबूर किया तो दूसरी ओर पैसे भी काफी जुटाए।

इंग्लैंड

साल 1695। इंग्लैंड का फ्रांस से युद्ध चल रहा था। यह युद्ध काफी महंगा साबित हुआ जिसके लिए इंग्लैंड को पैसा जुटाने की जरूरत पड़ी। सरकारी खजाने की आमदनी बढ़ाने के मकसद इंग्लिश क्राउन ने मैरिज ड्यूटी ऐक्ट लागू किया।

इस कानून के प्रावधान के मुताबिक, 25 साल से ज्यादा उम्र के सभी कुंवारों को एक निर्धारित राशि टैक्स के तौर पर देनी पड़ती थी।

नस्लभेद से भी संबंध

दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को बढ़ती आबादी गोरों के लिए चिंता का विषय बन गई थी। ऐसे में गोरों को अपनी आबादी बढ़ानी जरूरी थी, नहीं तो वे अश्वेतों से पीछे रह जाते। गोरों को शादी के लिए प्रेरित करने के मकसद से सरकार ने 1919 में बैचलर टैक्स लगाया।

अमेरिका

अमेरिका के मिशिगन में कई बार बैचलर टैक्स लगाने की कोशिश की गई। वहां ऐसा मानना था कि शादीशुदा लोगों के मुकाबले कुंवारे लोग अनैतिक व्यवहार के प्रति ज्यादा झुकाव रखते हैं।

बैचलर टैक्स को लेकर मिशिगन के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका तर्क था कि अगर कुंवारे पुरुषों पर टैक्स लग सकता है तो फिर कुंवारी महिलाओं पर भी टैक्स लगना चाहिए।

वहीं, मोंटेना में 1921 में सभी कुंवारों पर 3 डॉलर बैचलर टैक्स लगाया गया।

1934 में कैलिफॉर्निया में 25 डॉलर बैचलर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका मकसद राज्य के गिरती जन्म दर को बढ़ाना था। लेकिन प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया और यह वास्तव में काफी लागू नहीं हुआ।

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