छत्तीसगढ़धर्म/अध्यात्मराज्य

दीपावली की आधी रात की गयी (गौरा-गौरी) की पूजा-अर्चना, निभाई गयी परंपरा

गोवर्धन पूजा के बाद बाजे-गाजे के साथ किया जायेगा प्रतिमा को विसर्जित

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में दीपावली का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता हैं। दीपावली की आधी रात को अनेक मोहल्लों में भगवान शंकर एवं माता पार्वती (गौरा-गौरी) की प्रतिमा स्थापित कर रातभर पूजा-अर्चना की गयी। जिसके बाद अगले दिन याने आज प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

दीपावली के दिन बढ़ईपारा, रामसागरपारा, आमापारा, रामकुंड, बंधवापारा, लाखेनगर, पुरानी बस्ती, टूरी हटरी सहित अनेक इलाकों में गौरा-गौरी पर्व बड़े ही बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। तालाब से मिट्टी लाने की परंपरा निभाई गयी। जिसे चूलमाटी कहा जाता हैं।</>

इसी मिट्टी से गौरा-गौरी के प्रतीक स्वरूप प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इन प्रतिमाओं को आधी रात बाद स्थापित किया जाता हैं और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुरूप शिव-पार्वती का ब्याह करने की परंपरा निभाई जताई हैं। रातभर भजन-कीर्तन व गीत गाने का दौर चलता हैं। अगले दिन गोवर्धन पूजा के बाद बाजे-गाजे के साथ प्रतिमाओं को नदी-तालाब में विसर्जित किया जाता हैं।<>

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