दिमागी रूप से मृत घोषित युवक ने दो मरीजों को दिया नया जीवन

कोविड-19 महामारी ने भारत में अंग प्रत्यारोपण को प्रभावित किया

चेन्नई: कोविड-19 महामारी ने भारत में अंग प्रत्यारोपण को प्रभावित किया है. जिसकी वजह से अंगों की मांग बढ़ गई है और डोनर का मिलना मुश्किल हो गया, विशेषकर लंग और हार्ट ट्रांस्पलांट के लिए.

एमजीएम हेल्थकेयर के दो मरीजों को दिमागी रूप से मृत घोषित युवक के परिजनों ने दो मरीजों को उसका अंग दान कर दिया, जिसकी वजह से उनकी जिंदगी में उजाला फैला. 27 वर्षीय शख्स को सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद सेलम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसकी वजह से उसे दर्दनाक दिमाग में चोट का सामना करना पड़ा.

निजी अस्पताल एमजीएम हेल्थकेयर ने कहा कि डॉक्टरों के सर्वेश्रेष्ठ प्रयास के बावजूद उसे इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. उसके बाद, परिवारवालों की काउसिंलिंग की गई और ब्रेन डेड का सर्टिफिकेट स्वीकृत किया गया. इस कवायद का मकसद जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने के लिए परिजनों को अंगदान करने पर सहमत करना था.

सेलम में विशेषज्ञों की टीम ने उसके दिल और लंग्स को निकाला और अंगों को ले जाने के लिए सेलम- चेन्नई के बीच ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया. सेलम से अंगों को पहले एयर लिफ्ट किया गया और दो घंटे से भी कम समय में हेलीकॉप्टर के जरिए चेन्नई ले जाया गया.

एमजीएम हेल्थकेयर के विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नई जिंदगी देने के लिए जीवन रक्षक सर्जरी की और डोनेट किए हुए अंगों की बदौलत मरीजों को जीवनदान मिला. फिलहाल, दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और संक्रमण से बचाने के लिए सर्जरी को कोविड-19 के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद अंजाम दिया गया. उसके बाकी अंगों को अन्य अस्पतालों में भेज दिया गया.

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