फिर पेश किया गया राज्यसभा में सरकार द्वारा तीन तलाक बिल

8 जनवरी तक संसद का सत्र चलेगा। मगर, सरकार को राज्यसभा से बिल पास कराने के लिए महज पांच दिनों का ही समय मिलेगा।

मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को अपराध की श्रेणी में लाने वाला विधेयक बुधवार को फिर से राज्यसभा में पेश किया।

हालांकि, हंगामे के बाद 12 बजे तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को सदन में हंगामे के चलते सरकार इस बिल को ऊपरी सदन में नहीं पेश कर पाई थी।

8 जनवरी तक संसद का सत्र चलेगा। मगर, सरकार को राज्यसभा से बिल पास कराने के लिए महज पांच दिनों का ही समय मिलेगा।

इस दौरान यदि राज्यसभा में बिल पास नहीं हुआ, तो सरकार को फिर अध्यादेश लाना होगा।

बताते चलें कि राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन सरकार के पास उच्च सदन में पर्याप्त संख्याबल नहीं होने की वजह से उसे यह बिल पास कराने में कठिनाई आ रही है।

बताते चलें कि सरकार ने तीन तलाक को अपराध करार देने के लिए सितंबर में अध्यादेश जारी किया था। इसकी अवधि 6 महीने की होती है।

अगर इस दौरान संसद का सत्र आ जाए, तो सत्र शुरू होने से 42 दिन के भीतर अध्यादेश को बिल में बदलना होता है। मौजूदा संसद सत्र 8 जनवरी तक चलेगा।

अगर इस बार भी बिल राज्यसभा में अटक जाता है, तो सरकार को दोबारा अध्यादेश लाना पड़ेगा।

विपक्ष चयन समिति के पास भेजने पर अड़ा

वहीं, तीन तलाक बिल में संशोधन की मांग करते हुए एकजुट विपक्ष इसे चयन समिति के पास भेजने की मांग पर अड़ा हुआ है।

कांग्रेस के आनंद शर्मा इस बिल के जरिये उल्टा सरकार पर राजनीति का आरोप लगाते हैं। शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस बिल का विरोध नहीं कर रही, लेकिन राज्यसभा कोई रबर स्टांप नहीं है।

यदि लोकसभा ने खामियों पर चर्चा नहीं की, तो यह सदन भी उसी राह पर चले, यह जरूरी नहीं है।

शर्मा के मुताबिक, इस बिल की खामियों पर चर्चा होनी चाहिए और इस बिल को फिलहाल चयन समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

कांग्रेस की इस मांग को अन्य विपक्षी पार्टियों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।

वहीं, एनडीए सरकार लोकसभा से पारित बिल में बदलाव के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार आज फिर बिल पेश करने की कोशिश करेगी।

विपक्ष के रुख को देखते हुए सरकार ने कहा है कि वह बिल पारित कराने में अड़ंगा लगा रही है।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि विपक्ष का कोई सुझाव है, तो सरकार चर्चा के लिए तैयार है।

मगर, इंसानियत के नाते इस बिल को पारित किया जाना चाहिए। वे विपक्ष पर इस बिल को लेकर राजनीति करने का आरोप भी लगाते हैं।

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