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पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती इस बात को सच करती हैं लुधियाना की रजनी बाला

वह लुधियाना के हैबोवाल कलां स्थित सरकारी हाई स्कूल में अपने बेटे के साथ परीक्षा दे रही हैं.

हम अक्सर सुनते हैं कि पढने कोई उम्र नहीं होती है, लेकिन इसका एक जीता उदाहरण हैं लुधियाना की रजनी बाला अपने बेटे दीपक के साथ 10वीं की परीक्षा देकर पेश कर रही हैं.

वह लुधियाना के हैबोवाल कलां स्थित सरकारी हाई स्कूल में अपने बेटे के साथ परीक्षा दे रही हैं. हैबोवाल कलां निवासी 44 साल की रजनी इन दिनों अपने 16 साल के बेटे की क्लासमेट बनकर सरकारी हाई स्कूल हैबोवाल कलां में बने सेंटर में 10वीं क्लास की परीक्षा दे रही है.

रजनी ने बताया कि वह पढना चाहती थी. 9वीं पास करके वह 1989 में दसवीं में पहुंची थी. लेकिन सालाना परीक्षा के एक दिन पहले परिवार में परेशानी खड़ी हो गई. जिसके चलते वह परीक्षा नहीं दे सकी. रजनी की दो बेटियां ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी हैं और बेटा दीपक उसके साथ ही 10वीं की परीक्षा दे रहा है.

रजनी ने 29 साल पहले तरन तारन के आर्य गल्र्स हाई स्कूल से 9वीं की परीक्षा पास की थी. मगर पारिवारिक परेशानी के चलते वह 1990 में दसवीं क्लास की परीक्षा नहीं दे सकी. अब पति की प्रेरणा से उसने दोबारा पढ़ाई शुरू की.

रजनी बताती हैं कि पति राजकुमार साथी पिछले कई साल से उस पर आगे पढ़ाई करने को समझा रहे थे. पिछले साल उसने पंजाब ओपन स्कूल बोर्ड में दाखिला लिया और अब वह दसवीं की परीक्षा दे रही है. वह अपने घर में बेटे दीपक के साथ बैठकर परीक्षा की तैयारी करती है. दोनों एक साथ स्कूल भी जाते हैं. दोनों दोस्त की तरह की एक-दूसरे को सवाल भी समझाते हैं.

सिविल हॉस्पिटल में अटेंडेंट के तौर पर करती हैं काम

लुधियाना के सिविल हॉस्पिटल में पिछले साढ़े तीन साल से पार्ट टाइम वार्ड अटेंडेंट के तौर पर तैनात रजनी कहती हैं कि पढ़-लिख जाऊंगी तो नौकरी रेगुलर होने का चांस मिल सकता है. दसवीं के बाद वह आगे भी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और निजी तौर पर पढ़ते हुए ग्रेजुएशन करना उसका लक्ष्य है.

उन्होंने कहा कि शुरू-शुरू में छोटे बच्चों के बीच बैठकर पढना थोड़ा अजीब लगता था, लेकिन अब वह अपने फैसले पर खुश है. सुबह चार बजे से लेकर रात 11 बजे तक पढ़ाई से लेकर घर के काम तक में पति पूरा सहयोग दे रहे हैं. सास सुमित्रा देवी भले ही खुद पढ़ी लिखी नहीं हैं, लेकिन वे पढ़ाई में सपोर्ट करती हैं. घर पर बड़ी बेटी सुमन टीचर बनकर पढ़ाती है.

‘मां के साथ पेपर देना गर्व की बात’

मां और बेटे, दोनों एक साथ बैठकर परीक्षा की तैयारी करते हैं और इससे दोनों की सहायता भी हो जाती है. हालांकि, रजनी सिविल अस्पताल में कार्यरत होने के चलते रेगुलर स्कूल नहीं जा पाती और उन्होंने परीक्षा से पहले कुछ वक्त के लिए ट्यूशन लिया था. जबकि बेटे दीपक कहते हैं कि अपनी मां के साथ पेपर देने आना उनके लिए गर्व की बात है.

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