छत्तीसगढ़

कटघोरा नगरीय निकाय चुनाव 2019 में पार्टियों से पार्षद टिकट की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं में बन सकता है रोष

अरविंद शर्मा:

कटघोरा: जैसा कि नगरीय निकाय चुनाव 2019 का दौर शुरू हो चुका है आदर्श आचार संहिता शिथिल हो चुकी है।पार्षद उम्मीदवारों द्वारा नामांकन फार्म खरीदने का शिलशिला जोरो पर है।प्रमुख पार्टियों ने चुनावी मैदान में उरतने वाले भावी प्रत्याशियों के नाम उजागर नही किये हैं, बाउजूद कई कार्यकर्ताओं के चेहरों पर मायूसी साफ नजर आ रही है।

कुछ नए उमीदवारों को इस बार मौका

बात करे भारतीय जनता पार्टी की तो कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी से पार्षद टिकट के लिए आवेदन किया है अब भाजपा किसे प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारेगी ये तो अभी तक स्पष्ट नही हुआ है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ नए उमीदवारों को इस बार पार्टी मौका देने जा रही है।

अब आशंका यह भी जताई जा रही है कि अगर नए उम्मीदवारों को पार्टी द्वारा मौका दिया गया तो क्या नए उम्मीदवार पार्टी की साख बरकरार रख पाएंगे या हार का सबब बनेंगे।पार्टी के निर्णय से कार्यकर्ताओं में मायूषी देखने को मिल सकती है और कार्यकर्ता बगावत की ओर रुख कर सकते हैं जो कि पार्टी के लिए रोड़ा साबित हो सकता है।

कांग्रेस पार्टी की बात करे तो यहाँ भी इस बार कुछ नए चेहरे चुनावी मैदान में देखने को मिल सकते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि काग्रेस पार्टी के कई उम्मीदवार किसी अन्य वार्ड में जगह तलाश कर चुनाव लड़ने की मंशा बना रहे हैं अब जन्ताजनार्दन इन पर कितना भरोसा जताएगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में कई उम्मीदवार चुनावी दौड़ में शामिल हो सकते हैं जिसमे से कई उम्मीदवार तो ऐसे भी हो सकते हैं जो कि बीते चुनाव में करारी हार का सामना कर चुके हैं और इस बार जीत की उम्मीद रख दौड़ का हिस्सा बन रहे हैं।

आखिरकार जनता हारे हुए प्रत्याशी को कैसे वार्ड की जिम्मेदारी सौपेगी? कई उम्मीदवार तो ऐसे भी चुनावी मैदान में होंगे जिनके कार्यकाल में वार्डवासी समस्याओं से आये दिन हलाकान दिखाई दिए,अब जनता करेगी इनका हिसाब और चुनेगी जवाबदार पार्षद।

चुनावी उम्मीदवारो के चेहरों पर खुशी

अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि इस चुनाव में विजेता पार्षदों की बड़ी मात्रा में खरीद फरोख्त हो सकती है। देखा जा रहा है कि चुनावी उम्मीदवारो के चेहरों पर खुशी पसरी हुई है अगर चुनाव जीत गये तो पाँचो उंगली घी में होंगी। उम्मीदवारों की मंशा तो ये भी दिखाई पड़ रही है कि पार्टी से टिकट नही मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।

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