छत्तीसगढ़

तहसील परिसर में पीठासीन अधिकारी व वकील के बीच जमकर हुआ विवाद

नजारा देख पूरा परिसर रह गया सन्न...न्यायालय की मर्यादा हुई तार तार..

अरविन्द शर्मा:
कटघोरा: रोजाना की तरह कटघोरा तहसील परिसर में लोगो की आवाजाही चल ही रही थी कि एकाएक लगभग दो बजे पूरे तहसील परिसर में कोलाहल युक्त ध्वनि की गूंज ने सबका ध्यान आकर्षित कर लिया और अफरा तफरी का माहौल बन गया।पीठासीन अधिकारी कोर्ट में एक केश की सुनवाई को लेकर अचानक वकील व नायब तहसीलदार के बीच किसी बात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।पूरा नजारा देख तहसील परिसर में उपस्थित लोग भी हतप्रभ थे कि आखिर यह सब क्या हो रहा है।जहां आमजन न्याय के लिए तहसील कोर्ट का दरवाजा खटखटाते है वहाँ आखिरकार इस तरह का मख़ौल बन जाना न्यायालय की मर्यादा को तार तार कर रहा था।इस पूरे कोलाहल से तहसीलदार भी अपने चेम्बर से उतरकर परिसर में आ गए और माहौल कुछ समझ आता कि अभद्रता शुरू हो गई।माहौल काफी कश्मकश बन गया।मजे की बात तो यह रही कि तहसील परिसर में एसडीएम भी मौजूद रही और उन्हें इस माहौल की भनक तक नही लगी।देखते ही देखते झूमाझटकी जैसे हालात नजर आने लगे और वकील साहब माहौल गरम होते ही भागते नजर आने लगे।आखिर यह पूरा मामला क्या था?आखिर क्यों बने इस तरह के हालात?

पीठासीन अधिकारी कोर्ट में दो पक्षों का पुराना मामला चल रहा था जिसकी सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों के वकील भी मौजूद थे।नायब तहसीलदार की माने तो दिनांक 17/08/2020 को न्यायालयीन प्रकरण की सुनवाई के दौरान बतौर पीठासीन अधिकारी होने के नाते सुनवाई की जा रही थी।लगभग 2 बजे प्रकरण पक्षकार मोहनदास पिता अघनदास विरुद्ध गनपत सिह पिता दहराज सिह एवम अन्य के निजी भूमि के अतिक्रमण के मामले में सुनवाई के दौरान अनावेदक के अधिवक्ता गोपाल यादव एवम अनावेदक गनपत सिह निवासी मड़वाडोडा बुधनाथ सिंह पिता दहराज सिंह निवासी गेवरा बस्ती के द्वारा न्यायलयीन गरिमा का उल्लंघन करते हुए पीठासीन अधिकारी की ओर अभद्रतापूर्वक व्यवहार एवम गाली गलौच करते हुए अनुचित व्यवहार किया है।न्यायलयीन कक्ष में भयपूर्ण माहौल उत्पन्न किया है।बार बार बोलने और समझाने पर भी शांत नही हुए।न्यायलयीन कार्य मे बाधा उत्तपन्न कर न्यायालय परिसर में अभद्रता पूर्ण व्यवहार करते हुए तहसीलदार कटघोरा रोहित सिह,पीठासीन अधिकारी वाचक एवम न्यायलयीन कार्यालयीन कर्मचारी शिवचरण यादव (भृत्य),नारायण दास (कोटवार) को जान से मारने की धमकी देकर जोर जोर से चिल्लाने लगा तथा परिसर में मौजूद अधिवक्ता गणों के समझाने पर भी शांत नही हुए। न्यायलयीन कार्य मे बाधा उत्तपन्न कर भयपूर्ण भयादोहन तथा कानून का उल्लंघन किया है।

वहीं अगर पक्षकार के वकील गोपाल यादव की माने तो इन्होंने बताया कि पीठासीन अधिकारी रविशंकर राठौर के यहाँ एक पुराना 250/3 का प्रकरण चल रहा है। जो कि हमारे पक्षकार के द्वारा 20-25 वर्ष पूर्व एक जमीन खरीदी गई थी जिसमे कंट्रक्शन का कार्य चल रहा था जिसमे स्थगन आदेश दे दिया गया था जिसको लेकर हमारे द्वारा जांच के लिए समय मांगा जा रहा था इसी पर बहस हो रही थी।लेकिन अनावेदकगण के वकील इसमे मुझे समझाने लगे कि फर्जी दस्तावेज पेश कर दिए हो तो मैंने कहा कि यह जांच का विषय है और माननीय न्यायालय इसकी जांच करेगा।मगर अधिकारी का लेंग्वेज भी मानो इस कदर था कि हम जो बोल रहे हैं उसे सुनो। तुम हमे कानून मत सिखाओ हम जांच कर लेंगे।तब मैंने कहा कि न्यायालय ने जो आपको शक्तियां प्रदान की है उनकी एक गरिमा है आप जांच कर न्याय करें.. तो अधिकारी ने मुझे बोला कि तुम यहाँ से निकलो गेट आउट..तब मैंने कहा कि सर् न्यायालय की गरिमा हम भी समझते हैं और वकील होने के नाते मैं अपने पक्ष कार की पैरवी कर रहा हु जो कि मेरा काम है और आप मुझे गेट आउट कह रहे हैं ये कौन सी बात हुई..क्या एक वकील को पक्ष कार की पैरवी करने का अधिकार नही होता? ये बाते चल ही रही थी कि दूसरी तरफ़ बड़े तहसीलदार आवाज सुनकर पूरे महकमे के साथ तमतमाते हुए आ धमके और क्या चल रहा है कहते हुए कहने लगे …तो मैंने कहा कि सर् यहाँ हमारा एक जमीन संबंधित मामला चल रहा है जिसकी पैरवी मेरे द्वारा की जा रही है।बस फिर क्या था माहौल कुछ इस तरह हो गया कि अभद्रता शुरू हो गई और पकड़ो अंदर करो जैसे शब्दों का प्रयोग होने लगा.. तो मैं भी सहम गया आखिर ये सब क्या चल रहा है।

खैर वजह जो भी रही हो लेकिन इस बीच न्यायालय की गरिमा तो तार तार हो चुकी थी। वहीं दोनों पक्ष अपनी सफाई दलीलें सुनाने में लगे थे।कटघोरा तहसील में इस तरह का माहौल नजर आना अपने आप मे एक बड़ा सवाल है और एक सबक माना जा सकता है जहां लोग न्याय की उम्मीद लेकर आते हैं वहाँ एक वकील और पीठासीन अधिकारी का व्यवहार सभी को हैरत में डाल रहा है।अब सवाल यह है कि न्यायालय में इस तरह का मख़ौल बन जाना कितना मर्यादित था? कटघोरा तहसील परिसर में इस तरह की घटना अपने आप मे एक बड़ा सबब है।

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